30 अक्टूबर 2027 को दोहा का पंचांग

शनिवार, 30 अक्टूबर 2027, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

शनिवार, 30 अक्टूबर 2027 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (15:22 तक), नक्षत्र स्वाति (07:13 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:40 पर और सूर्यास्त 16:54 पर है। राहुकाल 08:28 से 09:53 तक है।

दिन और रात
दिन 05:40 – 16:54
रात 05:40 तक
तिथि
प्रतिपदा, 15:22 तक
द्वितीया
नक्षत्र
विशाखा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 15:22 तक
शुक्ल द्वितीया 14:43, 31 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 07:13 तक
विशाखा 07:01, 31 अक्टू॰ तक
योग
आयुष्मान 20:00 तक
सौभाग्य 18:26, 31 अक्टू॰ तक
करण
बव 15:22 तक
बालव 02:58, 31 अक्टू॰ तक
कौलव 14:43, 31 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
तुला 01:01, 31 अक्टू॰ तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:40
सूर्यास्त
16:54
चंद्रोदय
06:21
चंद्रास्त
17:17
दिनमान
11h 15m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:58 – 04:49
अभिजीत मुहूर्त
10:54 – 11:39

अशुभ समय

राहुकाल
08:28 – 09:53
यमगंड
12:41 – 14:06
गुलिक काल
05:40 – 07:04

30 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:40 – 07:04टालें
शुभ07:04 – 08:28शुभ
रोग08:28 – 09:53टालें
उद्वेग09:53 – 11:17टालें
चर11:17 – 12:41सामान्य
लाभ12:41 – 14:06शुभ
अमृत14:06 – 15:30शुभ
काल15:30 – 16:54टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ16:54 – 18:30शुभ
उद्वेग18:30 – 20:06टालें
शुभ20:06 – 21:41शुभ
अमृत21:41 – 23:17शुभ
चर23:17 – 00:53सामान्य
रोग00:53 – 02:29टालें
काल02:29 – 04:04टालें
लाभ04:04 – 05:40शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:4006:36दिन
गुरु06:3607:32दिन
मंगल07:3208:28दिन
सूर्य08:2809:24दिन
शुक्र09:2410:21दिन
बुध10:2111:17दिन
चंद्र11:1712:13दिन
शनि12:1313:09दिन
गुरु13:0914:06दिन
मंगल14:0615:02दिन
सूर्य15:0215:58दिन
शुक्र15:5816:54दिन
बुध16:5417:58रात
चंद्र17:5819:02रात
शनि19:0220:06रात
गुरु20:0621:10रात
मंगल21:1022:13रात
सूर्य22:1323:17रात
शुक्र23:1700:21रात
बुध00:2101:25रात
चंद्र01:2502:29रात
शनि02:2903:33रात
गुरु03:3304:36रात
मंगल04:3605:40रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
16 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2458° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।