16 दिसंबर 2027 को दोहा का पंचांग

गुरुवार, 16 दिसंबर 2027, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

गुरुवार, 16 दिसंबर 2027 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (10:52 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (06:43 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:12 पर और सूर्यास्त 16:46 पर है। राहुकाल 12:48 से 14:07 तक है।

दिन और रात
दिन 06:12 – 16:46
रात 06:12 तक
तिथि
तृतीया, 10:52 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
पुष्य, 04:37 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 दिसंबर 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 10:52 तक
कृष्ण चतुर्थी 08:04, 17 दिस॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 04:37, 17 दिस॰ तक
आश्लेषा 02:41, 18 दिस॰ तक
योग
ब्रह्म 07:12 तक
इंद्र 03:41, 17 दिस॰ तक
वैधृतिअशुभ 00:17, 18 दिस॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 10:52 तक
बव 21:27 तक
बालव 08:04, 17 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:12
सूर्यास्त
16:46
चंद्रोदय
19:48
चंद्रास्त
08:39
दिनमान
10h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:24 – 05:18
अभिजीत मुहूर्त
11:08 – 11:50

अशुभ समय

राहुकाल
12:48 – 14:07
यमगंड
06:12 – 07:31
गुलिक काल
08:50 – 10:09

16 दिसंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:12 – 07:31शुभ
रोग07:31 – 08:50टालें
उद्वेग08:50 – 10:09टालें
चर10:09 – 11:29सामान्य
लाभ11:29 – 12:48शुभ
अमृत12:48 – 14:07शुभ
काल14:07 – 15:27टालें
शुभ15:27 – 16:46शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत16:46 – 18:27शुभ
चर18:27 – 20:08सामान्य
रोग20:08 – 21:48टालें
काल21:48 – 23:29टालें
लाभ23:29 – 01:10शुभ
उद्वेग01:10 – 02:51टालें
शुभ02:51 – 04:31शुभ
अमृत04:31 – 06:12शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:1207:04दिन
मंगल07:0407:57दिन
सूर्य07:5708:50दिन
शुक्र08:5009:43दिन
बुध09:4310:36दिन
चंद्र10:3611:29दिन
शनि11:2912:22दिन
गुरु12:2213:15दिन
मंगल13:1514:07दिन
सूर्य14:0715:00दिन
शुक्र15:0015:53दिन
बुध15:5316:46दिन
चंद्र16:4617:53रात
शनि17:5319:00रात
गुरु19:0020:08रात
मंगल20:0821:15रात
सूर्य21:1522:22रात
शुक्र22:2223:29रात
बुध23:2900:36रात
चंद्र00:3601:43रात
शनि01:4302:51रात
गुरु02:5103:58रात
मंगल03:5805:05रात
सूर्य05:0506:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 दिस॰ 2027धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 दिस॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 दिस॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 दिस॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
31 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 जन॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 जन॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 जन॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2476° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।