11 सितंबर 2028 को दोहा का पंचांग

सोमवार, 11 सितंबर 2028, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

सोमवार, 11 सितंबर 2028 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (15:40 तक), नक्षत्र रोहिणी (23:41 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:18 पर और सूर्यास्त 17:41 पर है। राहुकाल 06:51 से 08:24 तक है।

दिन और रात
दिन 05:18 – 17:41
रात 05:18 तक
तिथि
सप्तमी, 15:40 तक
अष्टमी
नक्षत्र
रोहिणी, 23:41 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 सितंबर 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 15:40 तक
कृष्ण अष्टमी 15:40, 12 सित॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 23:41 तक
मृगशिरा 00:06, 13 सित॰ तक
योग
वज्रअशुभ 01:56, 12 सित॰ तक
सिद्धि 00:38, 13 सित॰ तक
करण
बव 15:40 तक
बालव 03:45, 12 सित॰ तक
कौलव 15:40, 12 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:18
सूर्यास्त
17:41
चंद्रोदय
22:18
चंद्रास्त
11:37
दिनमान
12h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:45 – 04:32
अभिजीत मुहूर्त
11:05 – 11:54

अशुभ समय

राहुकाल
06:51 – 08:24
यमगंड
09:57 – 11:30
गुलिक काल
13:03 – 14:36

11 सितंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:18 – 06:51शुभ
काल06:51 – 08:24टालें
शुभ08:24 – 09:57शुभ
रोग09:57 – 11:30टालें
उद्वेग11:30 – 13:03टालें
चर13:03 – 14:36सामान्य
लाभ14:36 – 16:08शुभ
अमृत16:08 – 17:41शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:41 – 19:09सामान्य
रोग19:09 – 20:36टालें
काल20:36 – 22:03टालें
लाभ22:03 – 23:30शुभ
उद्वेग23:30 – 00:57टालें
शुभ00:57 – 02:24शुभ
अमृत02:24 – 03:51शुभ
चर03:51 – 05:18सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:1806:20दिन
शनि06:2007:22दिन
गुरु07:2208:24दिन
मंगल08:2409:26दिन
सूर्य09:2610:28दिन
शुक्र10:2811:30दिन
बुध11:3012:32दिन
चंद्र12:3213:34दिन
शनि13:3414:36दिन
गुरु14:3615:37दिन
मंगल15:3716:39दिन
सूर्य16:3917:41दिन
शुक्र17:4118:39रात
बुध18:3919:38रात
चंद्र19:3820:36रात
शनि20:3621:34रात
गुरु21:3422:32रात
मंगल22:3223:30रात
सूर्य23:3000:28रात
शुक्र00:2801:26रात
बुध01:2602:24रात
चंद्र02:2403:22रात
शनि03:2204:20रात
गुरु04:2005:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 सित॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 सित॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 सित॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 सित॰ 2028कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2028आश्विन अमावस्याअमावस्या
22 सित॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 सित॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2028आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
7 अक्टू॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2579° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।