4 मार्च 2029 को दोहा का पंचांग

रविवार, 4 मार्च 2029, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

रविवार, 4 मार्च 2029 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (05:58 तक), नक्षत्र स्वाति (02:27, 5 मार्च तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:53 पर और सूर्यास्त 17:37 पर है। राहुकाल 16:09 से 17:37 तक है।

दिन और रात
दिन 05:53 – 17:37
रात 05:52 तक
तिथि
पंचमी, 03:10 तक
षष्ठी
नक्षत्र
स्वाति, 02:27 तक
विशाखा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 मार्च 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 05:58 तक
कृष्ण पंचमी 03:10, 5 मार्च तक
कृष्ण षष्ठी 00:56, 6 मार्च तक
नक्षत्र
स्वाति 02:27, 5 मार्च तक
विशाखा 00:55, 6 मार्च तक
योग
ध्रुव 01:49, 5 मार्च तक
व्याघातअशुभ 22:47, 5 मार्च तक
करण
बालव 05:58 तक
कौलव 16:30 तक
तैतिल 03:10, 5 मार्च तक
गर 13:58, 5 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:53
सूर्यास्त
17:37
चंद्रोदय
21:52
चंद्रास्त
08:07
दिनमान
11h 44m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:15 – 05:04
अभिजीत मुहूर्त
11:22 – 12:09

अशुभ समय

राहुकाल
16:09 – 17:37
यमगंड
11:45 – 13:13
गुलिक काल
14:41 – 16:09

4 मार्च 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:53 – 07:21टालें
चर07:21 – 08:49सामान्य
लाभ08:49 – 10:17शुभ
अमृत10:17 – 11:45शुभ
काल11:45 – 13:13टालें
शुभ13:13 – 14:41शुभ
रोग14:41 – 16:09टालें
उद्वेग16:09 – 17:37टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:37 – 19:09शुभ
अमृत19:09 – 20:41शुभ
चर20:41 – 22:13सामान्य
रोग22:13 – 23:45टालें
काल23:45 – 01:17टालें
लाभ01:17 – 02:49शुभ
उद्वेग02:49 – 04:21टालें
शुभ04:21 – 05:52शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:5306:52दिन
शुक्र06:5207:51दिन
बुध07:5108:49दिन
चंद्र08:4909:48दिन
शनि09:4810:47दिन
गुरु10:4711:45दिन
मंगल11:4512:44दिन
सूर्य12:4413:42दिन
शुक्र13:4214:41दिन
बुध14:4115:40दिन
चंद्र15:4016:38दिन
शनि16:3817:37दिन
गुरु17:3718:38रात
मंगल18:3819:40रात
सूर्य19:4020:41रात
शुक्र20:4121:42रात
बुध21:4222:43रात
चंद्र22:4323:45रात
शनि23:4500:46रात
गुरु00:4601:47रात
मंगल01:4702:49रात
सूर्य02:4903:50रात
शुक्र03:5004:51रात
बुध04:5105:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 मार्च 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 मार्च 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 मार्च 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 मार्च 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 मार्च 2029चैत्र अमावस्याअमावस्या
14 मार्च 2029मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
19 मार्च 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 मार्च 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 मार्च 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 मार्च 2029अधिक चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
2 अप्रैल 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2646° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।