17 अक्टूबर 2029 को दोहा का पंचांग

बुधवार, 17 अक्टूबर 2029, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

बुधवार, 17 अक्टूबर 2029 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (04:08, 18 अक्टू॰ तक), नक्षत्र धनिष्ठा (16:28 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 05:33 पर और सूर्यास्त 17:04 पर है। राहुकाल 11:19 से 12:45 तक है।

दिन और रात
दिन 05:33 – 17:04
रात 05:33 तक
तिथि
एकादशी, 04:08 तक
द्वादशी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 16:28 तक
शतभिषा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 04:08, 18 अक्टू॰ तक
शुक्ल द्वादशी 05:48, 19 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 18:30, 18 अक्टू॰ तक
योग
गंडअशुभ 04:07, 18 अक्टू॰ तक
वृद्धि 04:21, 19 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 15:27 तक
विष्टि (भद्रा) 04:08, 18 अक्टू॰ तक
बव 16:56, 18 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:33
सूर्यास्त
17:04
चंद्रोदय
14:04
चंद्रास्त
01:07
दिनमान
11h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:53 – 04:43
अभिजीत मुहूर्त
10:55 – 11:42 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:19 – 12:45
यमगंड
06:59 – 08:26
गुलिक काल
09:52 – 11:19

17 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:33 – 06:59शुभ
अमृत06:59 – 08:26शुभ
काल08:26 – 09:52टालें
शुभ09:52 – 11:19शुभ
रोग11:19 – 12:45टालें
उद्वेग12:45 – 14:11टालें
चर14:11 – 15:38सामान्य
लाभ15:38 – 17:04शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:04 – 18:38टालें
शुभ18:38 – 20:12शुभ
अमृत20:12 – 21:45शुभ
चर21:45 – 23:19सामान्य
रोग23:19 – 00:52टालें
काल00:52 – 02:26टालें
लाभ02:26 – 04:00शुभ
उद्वेग04:00 – 05:33टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3306:30दिन
चंद्र06:3007:28दिन
शनि07:2808:26दिन
गुरु08:2609:23दिन
मंगल09:2310:21दिन
सूर्य10:2111:19दिन
शुक्र11:1912:16दिन
बुध12:1613:14दिन
चंद्र13:1414:11दिन
शनि14:1115:09दिन
गुरु15:0916:07दिन
मंगल16:0717:04दिन
सूर्य17:0418:07रात
शुक्र18:0719:09रात
बुध19:0920:12रात
चंद्र20:1221:14रात
शनि21:1422:16रात
गुरु22:1623:19रात
मंगल23:1900:21रात
सूर्य00:2101:24रात
शुक्र01:2402:26रात
बुध02:2603:28रात
चंद्र03:2804:31रात
शनि04:3105:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2732° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।