12 जुलाई 2026 को दुबई का पंचांग

रविवार, 12 जुलाई 2026, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात। समय Asia/Dubai में है।

रविवार, 12 जुलाई 2026 को दुबई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (21:00 तक), नक्षत्र रोहिणी (06:59 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 05:36 पर और सूर्यास्त 19:12 पर है। राहुकाल 17:30 से 19:12 तक है।

दिन और रात
दिन 05:36 – 19:12
रात 05:37 तक
तिथि
त्रयोदशी, 21:00 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
मृगशिरा, 04:11 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 जुलाई 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 21:00 तक
कृष्ण चतुर्दशी 17:19, 13 जुल॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 06:59 तक
मृगशिरा 04:11, 13 जुल॰ तक
आर्द्रा 01:21, 14 जुल॰ तक
योग
वृद्धि 18:36 तक
ध्रुव 14:30, 13 जुल॰ तक
करण
गर 10:48 तक
वणिज 21:00 तक
विष्टि (भद्रा) 07:10, 13 जुल॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 17:36 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:36
सूर्यास्त
19:12
चंद्रोदय
02:55
चंद्रास्त
17:27
दिनमान
13h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:13 – 04:55
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:51

अशुभ समय

राहुकाल
17:30 – 19:12
यमगंड
12:24 – 14:06
गुलिक काल
15:48 – 17:30

12 जुलाई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:36 – 07:18टालें
चर07:18 – 09:00सामान्य
लाभ09:00 – 10:42शुभ
अमृत10:42 – 12:24शुभ
काल12:24 – 14:06टालें
शुभ14:06 – 15:48शुभ
रोग15:48 – 17:30टालें
उद्वेग17:30 – 19:12टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:12 – 20:30शुभ
अमृत20:30 – 21:48शुभ
चर21:48 – 23:06सामान्य
रोग23:06 – 00:24टालें
काल00:24 – 01:42टालें
लाभ01:42 – 03:00शुभ
उद्वेग03:00 – 04:19टालें
शुभ04:19 – 05:37शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3606:44दिन
शुक्र06:4407:52दिन
बुध07:5209:00दिन
चंद्र09:0010:08दिन
शनि10:0811:16दिन
गुरु11:1612:24दिन
मंगल12:2413:32दिन
सूर्य13:3214:40दिन
शुक्र14:4015:48दिन
बुध15:4816:56दिन
चंद्र16:5618:04दिन
शनि18:0419:12दिन
गुरु19:1220:04रात
मंगल20:0420:56रात
सूर्य20:5621:48रात
शुक्र21:4822:40रात
बुध22:4023:32रात
चंद्र23:3200:24रात
शनि00:2401:16रात
गुरु01:1602:08रात
मंगल02:0803:00रात
सूर्य03:0003:52रात
शुक्र03:5204:45रात
बुध04:4505:37रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जुल॰ 2026आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
16 जुल॰ 2026कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
17 जुल॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 जुल॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जुल॰ 2026आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
2 अग॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 अग॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 अग॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 अग॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां दुबई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2276° (लाहिड़ी)। समय दुबई (Asia/Dubai) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।