29 अगस्त 2027 को दुबई का पंचांग

रविवार, 29 अगस्त 2027, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात। समय Asia/Dubai में है।

रविवार, 29 अगस्त 2027 को दुबई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (08:06 तक), नक्षत्र पुष्य (02:15, 30 अग॰ तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:58 पर और सूर्यास्त 18:41 पर है। राहुकाल 17:05 से 18:41 तक है।

दिन और रात
दिन 05:58 – 18:41
रात 05:58 तक
तिथि
त्रयोदशी, 04:43 तक
नक्षत्र
पुष्य, 02:15 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 अगस्त 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 08:06 तक
कृष्ण त्रयोदशी 04:43, 30 अग॰ तक
कृष्ण चतुर्दशी 01:11, 31 अग॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 02:15, 30 अग॰ तक
आश्लेषा 23:33, 30 अग॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 07:58 तक
वरीयान 04:05, 30 अग॰ तक
परिघअशुभ 00:06, 31 अग॰ तक
करण
तैतिल 08:06 तक
गर 18:26 तक
वणिज 04:43, 30 अग॰ तक
विष्टि (भद्रा) 14:57, 30 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:58
सूर्यास्त
18:41
चंद्रोदय
03:02
चंद्रास्त
16:56
दिनमान
12h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:28 – 05:13
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
17:05 – 18:41
यमगंड
12:19 – 13:55
गुलिक काल
15:30 – 17:05

29 अगस्त 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:58 – 07:33टालें
चर07:33 – 09:09सामान्य
लाभ09:09 – 10:44शुभ
अमृत10:44 – 12:19शुभ
काल12:19 – 13:55टालें
शुभ13:55 – 15:30शुभ
रोग15:30 – 17:05टालें
उद्वेग17:05 – 18:41टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:41 – 20:05शुभ
अमृत20:05 – 21:30शुभ
चर21:30 – 22:55सामान्य
रोग22:55 – 00:19टालें
काल00:19 – 01:44टालें
लाभ01:44 – 03:09शुभ
उद्वेग03:09 – 04:34टालें
शुभ04:34 – 05:58शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:5807:01दिन
शुक्र07:0108:05दिन
बुध08:0509:09दिन
चंद्र09:0910:12दिन
शनि10:1211:16दिन
गुरु11:1612:19दिन
मंगल12:1913:23दिन
सूर्य13:2314:26दिन
शुक्र14:2615:30दिन
बुध15:3016:34दिन
चंद्र16:3417:37दिन
शनि17:3718:41दिन
गुरु18:4119:37रात
मंगल19:3720:34रात
सूर्य20:3421:30रात
शुक्र21:3022:27रात
बुध22:2723:23रात
चंद्र23:2300:19रात
शनि00:1901:16रात
गुरु01:1602:12रात
मंगल02:1203:09रात
सूर्य03:0904:05रात
शुक्र04:0505:02रात
बुध05:0205:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 अग॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
31 अग॰ 2027भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
4 सित॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 सित॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 सित॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 सित॰ 2027भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
17 सित॰ 2027कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 सित॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां दुबई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2434° (लाहिड़ी)। समय दुबई (Asia/Dubai) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।