22 जून 2029 को दुबई का पंचांग

शुक्रवार, 22 जून 2029, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात। समय Asia/Dubai में है।

शुक्रवार, 22 जून 2029 को दुबई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (17:04 तक), नक्षत्र स्वाति (18:31 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 05:29 पर और सूर्यास्त 19:12 पर है। राहुकाल 10:38 से 12:20 तक है।

दिन और रात
दिन 05:29 – 19:12
रात 05:29 तक
तिथि
एकादशी, 17:04 तक
द्वादशी
नक्षत्र
स्वाति, 18:31 तक
विशाखा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 जून 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 17:04 तक
शुक्ल द्वादशी 14:23, 23 जून तक
नक्षत्र
स्वाति 18:31 तक
विशाखा 16:38, 23 जून तक
योग
शिव 17:42 तक
सिद्ध 14:27, 23 जून तक
करण
वणिज 06:25 तक
विष्टि (भद्रा) 17:04 तक
बव 03:43, 23 जून तक
बालव 14:23, 23 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:29
सूर्यास्त
19:12
चंद्रोदय
15:28
चंद्रास्त
01:44
दिनमान
13h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:07 – 04:48
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:48

अशुभ समय

राहुकाल
10:38 – 12:20
यमगंड
15:46 – 17:29
गुलिक काल
07:12 – 08:55

22 जून 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:29 – 07:12सामान्य
लाभ07:12 – 08:55शुभ
अमृत08:55 – 10:38शुभ
काल10:38 – 12:20टालें
शुभ12:20 – 14:03शुभ
रोग14:03 – 15:46टालें
उद्वेग15:46 – 17:29टालें
चर17:29 – 19:12सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:12 – 20:29टालें
काल20:29 – 21:46टालें
लाभ21:46 – 23:03शुभ
उद्वेग23:03 – 00:21टालें
शुभ00:21 – 01:38शुभ
अमृत01:38 – 02:55शुभ
चर02:55 – 04:12सामान्य
रोग04:12 – 05:29टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:2906:38दिन
बुध06:3807:46दिन
चंद्र07:4608:55दिन
शनि08:5510:03दिन
गुरु10:0311:12दिन
मंगल11:1212:20दिन
सूर्य12:2013:29दिन
शुक्र13:2914:38दिन
बुध14:3815:46दिन
चंद्र15:4616:55दिन
शनि16:5518:03दिन
गुरु18:0319:12दिन
मंगल19:1220:03रात
सूर्य20:0320:55रात
शुक्र20:5521:46रात
बुध21:4622:38रात
चंद्र22:3823:29रात
शनि23:2900:21रात
गुरु00:2101:12रात
मंगल01:1202:04रात
सूर्य02:0402:55रात
शुक्र02:5503:47रात
बुध03:4704:38रात
चंद्र04:3805:29रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जून 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 जून 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 जून 2029ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
29 जून 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 जुल॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 जुल॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 जुल॰ 2029आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
15 जुल॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 जुल॰ 2029कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुल॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां दुबई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2688° (लाहिड़ी)। समय दुबई (Asia/Dubai) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।