4 नवंबर 2029 को दुबई का पंचांग

रविवार, 4 नवंबर 2029, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात। समय Asia/Dubai में है।

रविवार, 4 नवंबर 2029 को दुबई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (16:00 तक), नक्षत्र हस्त (14:49 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 06:28 पर और सूर्यास्त 17:36 पर है। राहुकाल 16:12 से 17:36 तक है।

दिन और रात
दिन 06:28 – 17:36
रात 06:29 तक
तिथि
त्रयोदशी, 16:00 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
हस्त, 14:49 तक
चित्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 नवंबर 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 16:00 तक
कृष्ण चतुर्दशी 12:15, 5 नव॰ तक
नक्षत्र
हस्त 14:49 तक
चित्रा 11:51, 5 नव॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 17:45 तक
प्रीति 13:27, 5 नव॰ तक
करण
वणिज 16:00 तक
विष्टि (भद्रा) 02:09, 5 नव॰ तक
शकुनि 12:15, 5 नव॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 01:21, 5 नव॰ तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:28
सूर्यास्त
17:36
चंद्रोदय
04:14
चंद्रास्त
16:00
दिनमान
11h 8m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:45 – 05:37
अभिजीत मुहूर्त
11:40 – 12:24

अशुभ समय

राहुकाल
16:12 – 17:36
यमगंड
12:02 – 13:25
गुलिक काल
14:49 – 16:12

4 नवंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:28 – 07:51टालें
चर07:51 – 09:15सामान्य
लाभ09:15 – 10:38शुभ
अमृत10:38 – 12:02शुभ
काल12:02 – 13:25टालें
शुभ13:25 – 14:49शुभ
रोग14:49 – 16:12टालें
उद्वेग16:12 – 17:36टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:36 – 19:12शुभ
अमृत19:12 – 20:49शुभ
चर20:49 – 22:26सामान्य
रोग22:26 – 00:02टालें
काल00:02 – 01:39टालें
लाभ01:39 – 03:15शुभ
उद्वेग03:15 – 04:52टालें
शुभ04:52 – 06:29शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:2807:24दिन
शुक्र07:2408:19दिन
बुध08:1909:15दिन
चंद्र09:1510:11दिन
शनि10:1111:06दिन
गुरु11:0612:02दिन
मंगल12:0212:57दिन
सूर्य12:5713:53दिन
शुक्र13:5314:49दिन
बुध14:4915:44दिन
चंद्र15:4416:40दिन
शनि16:4017:36दिन
गुरु17:3618:40रात
मंगल18:4019:45रात
सूर्य19:4520:49रात
शुक्र20:4921:53रात
बुध21:5322:58रात
चंद्र22:5800:02रात
शनि00:0201:07रात
गुरु01:0702:11रात
मंगल02:1103:15रात
सूर्य03:1504:20रात
शुक्र04:2005:24रात
बुध05:2406:29रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2029वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 नव॰ 2029कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
25 नव॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 नव॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां दुबई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2739° (लाहिड़ी)। समय दुबई (Asia/Dubai) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।