15 अक्टूबर 2029 को डरबन का पंचांग

सोमवार, 15 अक्टूबर 2029, डरबन, दक्षिण अफ़्रीका। समय Africa/Johannesburg में है।

सोमवार, 15 अक्टूबर 2029 को डरबन में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (01:08, 16 अक्टू॰ तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (12:47 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:17 पर और सूर्यास्त 18:05 पर है। राहुकाल 06:53 से 08:29 तक है।

दिन और रात
दिन 05:17 – 18:05
रात 05:16 तक
तिथि
नवमी, 01:08 तक
दशमी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 12:47 तक
श्रवण
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल नवमी 01:08, 16 अक्टू॰ तक
शुक्ल दशमी 01:53, 17 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 13:52, 16 अक्टू॰ तक
योग
धृति 03:41, 16 अक्टू॰ तक
शूलअशुभ 03:13, 17 अक्टू॰ तक
करण
बालव 12:59 तक
कौलव 01:08, 16 अक्टू॰ तक
तैतिल 13:26, 16 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:17
सूर्यास्त
18:05
चंद्रोदय
12:02
चंद्रास्त
01:01
दिनमान
12h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:48 – 04:33
अभिजीत मुहूर्त
11:16 – 12:07

अशुभ समय

राहुकाल
06:53 – 08:29
यमगंड
10:05 – 11:41
गुलिक काल
13:17 – 14:53

15 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:17 – 06:53शुभ
काल06:53 – 08:29टालें
शुभ08:29 – 10:05शुभ
रोग10:05 – 11:41टालें
उद्वेग11:41 – 13:17टालें
चर13:17 – 14:53सामान्य
लाभ14:53 – 16:29शुभ
अमृत16:29 – 18:05शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:05 – 19:29सामान्य
रोग19:29 – 20:53टालें
काल20:53 – 22:17टालें
लाभ22:17 – 23:41शुभ
उद्वेग23:41 – 01:05टालें
शुभ01:05 – 02:29शुभ
अमृत02:29 – 03:52शुभ
चर03:52 – 05:16सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:1706:21दिन
शनि06:2107:25दिन
गुरु07:2508:29दिन
मंगल08:2909:33दिन
सूर्य09:3310:37दिन
शुक्र10:3711:41दिन
बुध11:4112:45दिन
चंद्र12:4513:49दिन
शनि13:4914:53दिन
गुरु14:5315:57दिन
मंगल15:5717:01दिन
सूर्य17:0118:05दिन
शुक्र18:0519:01रात
बुध19:0119:57रात
चंद्र19:5720:53रात
शनि20:5321:49रात
गुरु21:4922:45रात
मंगल22:4523:41रात
सूर्य23:4100:37रात
शुक्र00:3701:33रात
बुध01:3302:29रात
चंद्र02:2903:24रात
शनि03:2404:20रात
गुरु04:2005:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां डरबन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2732° (लाहिड़ी)। समय डरबन (Africa/Johannesburg) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।