3 नवंबर 2029 को डरबन का पंचांग

शनिवार, 3 नवंबर 2029, डरबन, दक्षिण अफ़्रीका। समय Africa/Johannesburg में है।

शनिवार, 3 नवंबर 2029 को डरबन में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (17:28 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (15:30 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 04:59 पर और सूर्यास्त 18:19 पर है। राहुकाल 08:19 से 09:59 तक है।

दिन और रात
दिन 04:59 – 18:19
रात 04:58 तक
तिथि
द्वादशी, 17:28 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 15:30 तक
हस्त
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 नवंबर 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 17:28 तक
कृष्ण त्रयोदशी 14:00, 4 नव॰ तक
नक्षत्र
हस्त 12:49, 4 नव॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 19:49 तक
विष्कंभअशुभ 15:45, 4 नव॰ तक
करण
कौलव 07:02 तक
तैतिल 17:28 तक
गर 03:46, 4 नव॰ तक
वणिज 14:00, 4 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
04:59
सूर्यास्त
18:19
चंद्रोदय
02:37
चंद्रास्त
15:24
दिनमान
13h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:34 – 04:16
अभिजीत मुहूर्त
11:12 – 12:06

अशुभ समय

राहुकाल
08:19 – 09:59
यमगंड
13:19 – 14:59
गुलिक काल
04:59 – 06:39

3 नवंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल04:59 – 06:39टालें
शुभ06:39 – 08:19शुभ
रोग08:19 – 09:59टालें
उद्वेग09:59 – 11:39टालें
चर11:39 – 13:19सामान्य
लाभ13:19 – 14:59शुभ
अमृत14:59 – 16:39शुभ
काल16:39 – 18:19टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:19 – 19:39शुभ
उद्वेग19:39 – 20:59टालें
शुभ20:59 – 22:19शुभ
अमृत22:19 – 23:39शुभ
चर23:39 – 00:59सामान्य
रोग00:59 – 02:19टालें
काल02:19 – 03:39टालें
लाभ03:39 – 04:58शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि04:5906:06दिन
गुरु06:0607:13दिन
मंगल07:1308:19दिन
सूर्य08:1909:26दिन
शुक्र09:2610:32दिन
बुध10:3211:39दिन
चंद्र11:3912:46दिन
शनि12:4613:52दिन
गुरु13:5214:59दिन
मंगल14:5916:06दिन
सूर्य16:0617:12दिन
शुक्र17:1218:19दिन
बुध18:1919:12रात
चंद्र19:1220:06रात
शनि20:0620:59रात
गुरु20:5921:52रात
मंगल21:5222:45रात
सूर्य22:4523:39रात
शुक्र23:3900:32रात
बुध00:3201:25रात
चंद्र01:2502:19रात
शनि02:1903:12रात
गुरु03:1204:05रात
मंगल04:0504:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2029वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 नव॰ 2029कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
25 नव॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 नव॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां डरबन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2739° (लाहिड़ी)। समय डरबन (Africa/Johannesburg) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।