14 दिसंबर 2024 को द्वारका का पंचांग

शनिवार, 14 दिसंबर 2024, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 14 दिसंबर 2024 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (16:59 तक), नक्षत्र रोहिणी (03:54, 15 दिस॰ तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 07:25 पर और सूर्यास्त 18:12 पर है। राहुकाल 10:07 से 11:27 तक है।

दिन और रात
दिन 07:25 – 18:12
रात 07:25 तक
तिथि
चतुर्दशी, 16:59 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
रोहिणी, 03:54 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 दिसंबर 2024 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 16:59 तक
पूर्णिमा 14:31, 15 दिस॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 03:54, 15 दिस॰ तक
मृगशिरा 02:20, 16 दिस॰ तक
योग
सिद्ध 08:26 तक
साध्य 05:07, 15 दिस॰ तक
शुभ 02:03, 16 दिस॰ तक
करण
वणिज 16:59 तक
विष्टि (भद्रा) 03:43, 15 दिस॰ तक
बव 14:31, 15 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:25
सूर्यास्त
18:12
चंद्रोदय
17:07
चंद्रास्त
06:11
दिनमान
10h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:39 – 06:32
अभिजीत मुहूर्त
12:27 – 13:10

अशुभ समय

राहुकाल
10:07 – 11:27
यमगंड
14:09 – 15:30
गुलिक काल
07:25 – 08:46

14 दिसंबर 2024 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल07:25 – 08:46टालें
शुभ08:46 – 10:07शुभ
रोग10:07 – 11:27टालें
उद्वेग11:27 – 12:48टालें
चर12:48 – 14:09सामान्य
लाभ14:09 – 15:30शुभ
अमृत15:30 – 16:51शुभ
काल16:51 – 18:12टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:12 – 19:51शुभ
उद्वेग19:51 – 21:30टालें
शुभ21:30 – 23:10शुभ
अमृत23:10 – 00:49शुभ
चर00:49 – 02:28सामान्य
रोग02:28 – 04:07टालें
काल04:07 – 05:46टालें
लाभ05:46 – 07:25शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि07:2508:19दिन
गुरु08:1909:13दिन
मंगल09:1310:07दिन
सूर्य10:0711:00दिन
शुक्र11:0011:54दिन
बुध11:5412:48दिन
चंद्र12:4813:42दिन
शनि13:4214:36दिन
गुरु14:3615:30दिन
मंगल15:3016:24दिन
सूर्य16:2417:18दिन
शुक्र17:1818:12दिन
बुध18:1219:18रात
चंद्र19:1820:24रात
शनि20:2421:30रात
गुरु21:3022:36रात
मंगल22:3623:43रात
सूर्य23:4300:49रात
शुक्र00:4901:55रात
बुध01:5503:01रात
चंद्र03:0104:07रात
शनि04:0705:13रात
गुरु05:1306:19रात
मंगल06:1907:25रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 दिस॰ 2024मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
15 दिस॰ 2024धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
19 दिस॰ 2024संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 दिस॰ 2024कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 दिस॰ 2024कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 दिस॰ 2024प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 दिस॰ 2024पौष अमावस्याअमावस्या
3 जन॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 जन॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 जन॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां द्वारका में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2056° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।