21 जनवरी 2025 को द्वारका का पंचांग

मंगलवार, 21 जनवरी 2025, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 21 जनवरी 2025 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (12:40 तक), नक्षत्र चित्रा (23:36 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 07:35 पर और सूर्यास्त 18:35 पर है। राहुकाल 15:50 से 17:13 तक है।

दिन और रात
दिन 07:35 – 18:35
रात 07:35 तक
तिथि
सप्तमी, 12:40 तक
अष्टमी
नक्षत्र
चित्रा, 23:36 तक
स्वाति
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 जनवरी 2025 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 12:40 तक
कृष्ण अष्टमी 15:18, 22 जन॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 23:36 तक
स्वाति 02:34, 23 जन॰ तक
योग
धृति 03:49, 22 जन॰ तक
शूलअशुभ 04:37, 23 जन॰ तक
करण
बव 12:40 तक
बालव 02:00, 22 जन॰ तक
कौलव 15:18, 22 जन॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 10:03 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:35
सूर्यास्त
18:35
चंद्रोदय
00:17
चंद्रास्त
12:00
दिनमान
11h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:51 – 06:43
अभिजीत मुहूर्त
12:43 – 13:27

अशुभ समय

राहुकाल
15:50 – 17:13
यमगंड
10:20 – 11:43
गुलिक काल
13:05 – 14:28

21 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:35 – 08:57टालें
उद्वेग08:57 – 10:20टालें
चर10:20 – 11:43सामान्य
लाभ11:43 – 13:05शुभ
अमृत13:05 – 14:28शुभ
काल14:28 – 15:50टालें
शुभ15:50 – 17:13शुभ
रोग17:13 – 18:35टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:35 – 20:13टालें
लाभ20:13 – 21:50शुभ
उद्वेग21:50 – 23:27टालें
शुभ23:27 – 01:05शुभ
अमृत01:05 – 02:42शुभ
चर02:42 – 04:20सामान्य
रोग04:20 – 05:57टालें
काल05:57 – 07:35टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:3508:30दिन
सूर्य08:3009:25दिन
शुक्र09:2510:20दिन
बुध10:2011:15दिन
चंद्र11:1512:10दिन
शनि12:1013:05दिन
गुरु13:0514:00दिन
मंगल14:0014:55दिन
सूर्य14:5515:50दिन
शुक्र15:5016:45दिन
बुध16:4517:40दिन
चंद्र17:4018:35दिन
शनि18:3519:40रात
गुरु19:4020:45रात
मंगल20:4521:50रात
सूर्य21:5022:55रात
शुक्र22:5500:00रात
बुध00:0001:05रात
चंद्र01:0502:10रात
शनि02:1003:15रात
गुरु03:1504:20रात
मंगल04:2005:25रात
सूर्य05:2506:30रात
शुक्र06:3007:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
2 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
12 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां द्वारका में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2071° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।