26 अगस्त 2025 को द्वारका का पंचांग

मंगलवार, 26 अगस्त 2025, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 26 अगस्त 2025 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (13:55 तक), नक्षत्र हस्त (06:04, 27 अग॰ तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 19:16 पर है। राहुकाल 16:06 से 17:41 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 19:16
रात 06:35 तक
तिथि
तृतीया, 13:55 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
हस्त, 06:04 तक
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 अगस्त 2025 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 13:55 तक
शुक्ल चतुर्थी 15:44, 27 अग॰ तक
नक्षत्र
हस्त 06:04, 27 अग॰ तक
चित्रा 08:43, 28 अग॰ तक
योग
साध्य 12:08 तक
शुभ 12:34, 27 अग॰ तक
करण
गर 13:55 तक
वणिज 02:46, 27 अग॰ तक
विष्टि (भद्रा) 15:44, 27 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
19:16
चंद्रोदय
09:05
चंद्रास्त
21:05
दिनमान
12h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:04 – 05:49
अभिजीत मुहूर्त
12:30 – 13:21

अशुभ समय

राहुकाल
16:06 – 17:41
यमगंड
09:45 – 11:20
गुलिक काल
12:55 – 14:30

26 अगस्त 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:35 – 08:10टालें
उद्वेग08:10 – 09:45टालें
चर09:45 – 11:20सामान्य
लाभ11:20 – 12:55शुभ
अमृत12:55 – 14:30शुभ
काल14:30 – 16:06टालें
शुभ16:06 – 17:41शुभ
रोग17:41 – 19:16टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल19:16 – 20:41टालें
लाभ20:41 – 22:06शुभ
उद्वेग22:06 – 23:31टालें
शुभ23:31 – 00:55शुभ
अमृत00:55 – 02:20शुभ
चर02:20 – 03:45सामान्य
रोग03:45 – 05:10टालें
काल05:10 – 06:35टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:3507:38दिन
सूर्य07:3808:42दिन
शुक्र08:4209:45दिन
बुध09:4510:48दिन
चंद्र10:4811:52दिन
शनि11:5212:55दिन
गुरु12:5513:59दिन
मंगल13:5915:02दिन
सूर्य15:0216:06दिन
शुक्र16:0617:09दिन
बुध17:0918:12दिन
चंद्र18:1219:16दिन
शनि19:1620:12रात
गुरु20:1221:09रात
मंगल21:0922:06रात
सूर्य22:0623:02रात
शुक्र23:0223:59रात
बुध23:5900:55रात
चंद्र00:5501:52रात
शनि01:5202:49रात
गुरु02:4903:45रात
मंगल03:4504:42रात
सूर्य04:4205:38रात
शुक्र05:3806:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 अग॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 सित॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 सित॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 सित॰ 2025भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
11 सित॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 सित॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 सित॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 सित॰ 2025कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या

तिथियां द्वारका में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2154° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।