2 अक्टूबर 2027 को द्वारका का पंचांग

शनिवार, 2 अक्टूबर 2027, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 2 अक्टूबर 2027 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (02:09, 3 अक्टू॰ तक), नक्षत्र स्वाति (00:03, 3 अक्टू॰ तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:45 पर और सूर्यास्त 18:41 पर है। राहुकाल 09:44 से 11:14 तक है।

दिन और रात
दिन 06:45 – 18:41
रात 06:46 तक
तिथि
तृतीया, 02:09 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
स्वाति, 00:03 तक
विशाखा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 02:09, 3 अक्टू॰ तक
शुक्ल चतुर्थी 01:28, 4 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 00:03, 3 अक्टू॰ तक
विशाखा 00:00, 4 अक्टू॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 15:41 तक
विष्कंभअशुभ 13:45, 3 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 14:46 तक
गर 02:09, 3 अक्टू॰ तक
वणिज 13:43, 3 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:45
सूर्यास्त
18:41
चंद्रोदय
08:48
चंद्रास्त
20:06
दिनमान
11h 56m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:09 – 05:57
अभिजीत मुहूर्त
12:19 – 13:07

अशुभ समय

राहुकाल
09:44 – 11:14
यमगंड
14:12 – 15:42
गुलिक काल
06:45 – 08:15

2 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:45 – 08:15टालें
शुभ08:15 – 09:44शुभ
रोग09:44 – 11:14टालें
उद्वेग11:14 – 12:43टालें
चर12:43 – 14:12सामान्य
लाभ14:12 – 15:42शुभ
अमृत15:42 – 17:11शुभ
काल17:11 – 18:41टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:41 – 20:11शुभ
उद्वेग20:11 – 21:42टालें
शुभ21:42 – 23:13शुभ
अमृत23:13 – 00:43शुभ
चर00:43 – 02:14सामान्य
रोग02:14 – 03:44टालें
काल03:44 – 05:15टालें
लाभ05:15 – 06:46शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:4507:45दिन
गुरु07:4508:44दिन
मंगल08:4409:44दिन
सूर्य09:4410:44दिन
शुक्र10:4411:43दिन
बुध11:4312:43दिन
चंद्र12:4313:43दिन
शनि13:4314:42दिन
गुरु14:4215:42दिन
मंगल15:4216:41दिन
सूर्य16:4117:41दिन
शुक्र17:4118:41दिन
बुध18:4119:41रात
चंद्र19:4120:41रात
शनि20:4121:42रात
गुरु21:4222:42रात
मंगल22:4223:43रात
सूर्य23:4300:43रात
शुक्र00:4301:44रात
बुध01:4402:44रात
चंद्र02:4403:44रात
शनि03:4404:45रात
गुरु04:4505:45रात
मंगल05:4506:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
18 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या

तिथियां द्वारका में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2447° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।