4 नवंबर 2027 को ह्यूस्टन का पंचांग

गुरुवार, 4 नवंबर 2027, ह्यूस्टन, संयुक्त राज्य। समय America/Chicago में है।

गुरुवार, 4 नवंबर 2027 को ह्यूस्टन में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (11:08 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (07:49, 5 नव॰ तक) और योग धृति है। सूर्योदय 07:37 पर और सूर्यास्त 18:32 पर है। राहुकाल 14:26 से 15:48 तक है।

दिन और रात
दिन 07:37 – 18:32
रात 07:38 तक
तिथि
षष्ठी, 11:08 तक
सप्तमी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 नवंबर 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 11:08 तक
शुक्ल सप्तमी 13:39, 5 नव॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 07:49, 5 नव॰ तक
योग
धृति 09:32 तक
शूलअशुभ 10:24, 5 नव॰ तक
करण
तैतिल 11:08 तक
गर 00:21, 5 नव॰ तक
वणिज 13:39, 5 नव॰ तक
चंद्र राशि
धनु 11:37 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:37
सूर्यास्त
18:32
चंद्रोदय
13:09
चंद्रास्त
23:44
दिनमान
10h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:52 – 06:44
अभिजीत मुहूर्त
12:43 – 13:26

अशुभ समय

राहुकाल
14:26 – 15:48
यमगंड
07:37 – 08:59
गुलिक काल
10:21 – 11:42

4 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:37 – 08:59शुभ
रोग08:59 – 10:21टालें
उद्वेग10:21 – 11:42टालें
चर11:42 – 13:04सामान्य
लाभ13:04 – 14:26शुभ
अमृत14:26 – 15:48शुभ
काल15:48 – 17:10टालें
शुभ17:10 – 18:32शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:32 – 20:10शुभ
चर20:10 – 21:48सामान्य
रोग21:48 – 23:27टालें
काल23:27 – 01:05टालें
लाभ01:05 – 02:43शुभ
उद्वेग02:43 – 04:21टालें
शुभ04:21 – 05:59शुभ
अमृत05:59 – 07:38शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:3708:31दिन
मंगल08:3109:26दिन
सूर्य09:2610:21दिन
शुक्र10:2111:15दिन
बुध11:1512:10दिन
चंद्र12:1013:04दिन
शनि13:0413:59दिन
गुरु13:5914:54दिन
मंगल14:5415:48दिन
सूर्य15:4816:43दिन
शुक्र16:4317:37दिन
बुध17:3718:32दिन
चंद्र18:3219:37रात
शनि19:3720:43रात
गुरु20:4321:48रात
मंगल21:4822:54रात
सूर्य22:5423:59रात
शुक्र23:5901:05रात
बुध01:0502:10रात
चंद्र02:1003:16रात
शनि03:1604:21रात
गुरु04:2105:27रात
मंगल05:2706:32रात
सूर्य06:3207:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
16 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
1 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां ह्यूस्टन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2460° (लाहिड़ी)। समय ह्यूस्टन (America/Chicago) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।