13 सितंबर 2026 को इम्फाल का पंचांग

रविवार, 13 सितंबर 2026, इम्फाल, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 13 सितंबर 2026 को इम्फाल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (07:08 तक), नक्षत्र हस्त (13:07 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 04:59 पर और सूर्यास्त 17:20 पर है। राहुकाल 15:47 से 17:20 तक है।

दिन और रात
दिन 04:59 – 17:20
रात 04:59 तक
तिथि
तृतीया
नक्षत्र
हस्त, 13:07 तक
चित्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 सितंबर 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 07:08 तक
शुक्ल तृतीया 07:07, 14 सित॰ तक
नक्षत्र
हस्त 13:07 तक
चित्रा 13:55, 14 सित॰ तक
योग
शुक्ल 13:43 तक
ब्रह्म 12:46, 14 सित॰ तक
करण
कौलव 07:08 तक
तैतिल 19:03 तक
गर 07:07, 14 सित॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 01:26, 14 सित॰ तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
04:59
सूर्यास्त
17:20
चंद्रोदय
06:49
चंद्रास्त
18:30
दिनमान
12h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:26 – 04:12
अभिजीत मुहूर्त
10:45 – 11:34

अशुभ समय

राहुकाल
15:47 – 17:20
यमगंड
11:10 – 12:42
गुलिक काल
14:15 – 15:47

13 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग04:59 – 06:32टालें
चर06:32 – 08:04सामान्य
लाभ08:04 – 09:37शुभ
अमृत09:37 – 11:10शुभ
काल11:10 – 12:42टालें
शुभ12:42 – 14:15शुभ
रोग14:15 – 15:47टालें
उद्वेग15:47 – 17:20टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:20 – 18:48शुभ
अमृत18:48 – 20:15शुभ
चर20:15 – 21:42सामान्य
रोग21:42 – 23:10टालें
काल23:10 – 00:37टालें
लाभ00:37 – 02:05शुभ
उद्वेग02:05 – 03:32टालें
शुभ03:32 – 04:59शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य04:5906:01दिन
शुक्र06:0107:03दिन
बुध07:0308:04दिन
चंद्र08:0409:06दिन
शनि09:0610:08दिन
गुरु10:0811:10दिन
मंगल11:1012:11दिन
सूर्य12:1113:13दिन
शुक्र13:1314:15दिन
बुध14:1515:17दिन
चंद्र15:1716:18दिन
शनि16:1817:20दिन
गुरु17:2018:18रात
मंगल18:1819:17रात
सूर्य19:1720:15रात
शुक्र20:1521:13रात
बुध21:1322:11रात
चंद्र22:1123:10रात
शनि23:1000:08रात
गुरु00:0801:06रात
मंगल01:0602:05रात
सूर्य02:0503:03रात
शुक्र03:0304:01रात
बुध04:0104:59रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 सित॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2026कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
22 सित॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 सित॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 सित॰ 2026भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
30 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या

तिथियां इम्फाल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2300° (लाहिड़ी)। समय इम्फाल (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।