12 अक्टूबर 2026 को इम्फाल का पंचांग

सोमवार, 12 अक्टूबर 2026, इम्फाल, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को इम्फाल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (22:13 तक), नक्षत्र स्वाति (23:52 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 05:10 पर और सूर्यास्त 16:50 पर है। राहुकाल 06:38 से 08:05 तक है।

दिन और रात
दिन 05:10 – 16:50
रात 05:11 तक
तिथि
द्वितीया, 22:13 तक
तृतीया
नक्षत्र
स्वाति, 23:52 तक
विशाखा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 22:13 तक
शुक्ल तृतीया 23:28, 13 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 23:52 तक
विशाखा 01:43, 14 अक्टू॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 20:32 तक
प्रीति 20:23, 13 अक्टू॰ तक
करण
बालव 09:48 तक
कौलव 22:13 तक
तैतिल 10:46, 13 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:10
सूर्यास्त
16:50
चंद्रोदय
06:30
चंद्रास्त
17:39
दिनमान
11h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:32 – 04:21
अभिजीत मुहूर्त
10:37 – 11:23

अशुभ समय

राहुकाल
06:38 – 08:05
यमगंड
09:33 – 11:00
गुलिक काल
12:28 – 13:55

12 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:10 – 06:38शुभ
काल06:38 – 08:05टालें
शुभ08:05 – 09:33शुभ
रोग09:33 – 11:00टालें
उद्वेग11:00 – 12:28टालें
चर12:28 – 13:55सामान्य
लाभ13:55 – 15:22शुभ
अमृत15:22 – 16:50शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर16:50 – 18:23सामान्य
रोग18:23 – 19:55टालें
काल19:55 – 21:28टालें
लाभ21:28 – 23:00शुभ
उद्वेग23:00 – 00:33टालें
शुभ00:33 – 02:06शुभ
अमृत02:06 – 03:38शुभ
चर03:38 – 05:11सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:1006:09दिन
शनि06:0907:07दिन
गुरु07:0708:05दिन
मंगल08:0509:03दिन
सूर्य09:0310:02दिन
शुक्र10:0211:00दिन
बुध11:0011:58दिन
चंद्र11:5812:57दिन
शनि12:5713:55दिन
गुरु13:5514:53दिन
मंगल14:5315:52दिन
सूर्य15:5216:50दिन
शुक्र16:5017:52रात
बुध17:5218:53रात
चंद्र18:5319:55रात
शनि19:5520:57रात
गुरु20:5721:59रात
मंगल21:5923:00रात
सूर्य23:0000:02रात
शुक्र00:0201:04रात
बुध01:0402:06रात
चंद्र02:0603:07रात
शनि03:0704:09रात
गुरु04:0905:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या

तिथियां इम्फाल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2311° (लाहिड़ी)। समय इम्फाल (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।