2 जनवरी 2029 को इम्फाल का पंचांग

मंगलवार, 2 जनवरी 2029, इम्फाल, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 2 जनवरी 2029 को इम्फाल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (19:06 तक), नक्षत्र पुष्य (02:44, 3 जन॰ तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:59 पर और सूर्यास्त 16:37 पर है। राहुकाल 13:57 से 15:17 तक है।

दिन और रात
दिन 05:59 – 16:37
रात 05:59 तक
तिथि
द्वितीया, 19:06 तक
तृतीया
नक्षत्र
पुष्य, 02:44 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 जनवरी 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 19:06 तक
कृष्ण तृतीया 17:03, 3 जन॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 02:44, 3 जन॰ तक
आश्लेषा 01:18, 4 जन॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 18:32 तक
विष्कंभअशुभ 15:38, 3 जन॰ तक
करण
तैतिल 08:02 तक
गर 19:06 तक
वणिज 06:06, 3 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:59
सूर्यास्त
16:37
चंद्रोदय
18:24
चंद्रास्त
07:07
दिनमान
10h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:12 – 05:05
अभिजीत मुहूर्त
10:57 – 11:39

अशुभ समय

राहुकाल
13:57 – 15:17
यमगंड
08:38 – 09:58
गुलिक काल
11:18 – 12:38

2 जनवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:59 – 07:18टालें
उद्वेग07:18 – 08:38टालें
चर08:38 – 09:58सामान्य
लाभ09:58 – 11:18शुभ
अमृत11:18 – 12:38शुभ
काल12:38 – 13:57टालें
शुभ13:57 – 15:17शुभ
रोग15:17 – 16:37टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल16:37 – 18:17टालें
लाभ18:17 – 19:57शुभ
उद्वेग19:57 – 21:38टालें
शुभ21:38 – 23:18शुभ
अमृत23:18 – 00:58शुभ
चर00:58 – 02:38सामान्य
रोग02:38 – 04:19टालें
काल04:19 – 05:59टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:5906:52दिन
सूर्य06:5207:45दिन
शुक्र07:4508:38दिन
बुध08:3809:31दिन
चंद्र09:3110:25दिन
शनि10:2511:18दिन
गुरु11:1812:11दिन
मंगल12:1113:04दिन
सूर्य13:0413:57दिन
शुक्र13:5714:51दिन
बुध14:5115:44दिन
चंद्र15:4416:37दिन
शनि16:3717:44रात
गुरु17:4418:51रात
मंगल18:5119:57रात
सूर्य19:5721:04रात
शुक्र21:0422:11रात
बुध22:1123:18रात
चंद्र23:1800:25रात
शनि00:2501:32रात
गुरु01:3202:38रात
मंगल02:3803:45रात
सूर्य03:4504:52रात
शुक्र04:5205:59रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 जन॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 जन॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 जन॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जन॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जन॰ 2029माघ अमावस्याअमावस्या
14 जन॰ 2029मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 जन॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 जन॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 जन॰ 2029माघ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां इम्फाल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2622° (लाहिड़ी)। समय इम्फाल (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।