2 दिसंबर 2029 को इम्फाल का पंचांग

रविवार, 2 दिसंबर 2029, इम्फाल, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 2 दिसंबर 2029 को इम्फाल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (09:52 तक), नक्षत्र चित्रा (23:55 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:42 पर और सूर्यास्त 16:24 पर है। राहुकाल 15:04 से 16:24 तक है।

दिन और रात
दिन 05:42 – 16:24
रात 05:43 तक
तिथि
एकादशी, 09:52 तक
द्वादशी
नक्षत्र
चित्रा, 23:55 तक
स्वाति
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 दिसंबर 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 09:52 तक
कृष्ण द्वादशी 06:41, 3 दिस॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 23:55 तक
स्वाति 21:18, 3 दिस॰ तक
योग
सौभाग्य 00:03, 3 दिस॰ तक
शोभन 20:04, 3 दिस॰ तक
करण
बालव 09:52 तक
कौलव 20:19 तक
तैतिल 06:41, 3 दिस॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 13:08 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:42
सूर्यास्त
16:24
चंद्रोदय
01:48
चंद्रास्त
13:25
दिनमान
10h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:56 – 04:49
अभिजीत मुहूर्त
10:42 – 11:24

अशुभ समय

राहुकाल
15:04 – 16:24
यमगंड
11:03 – 12:23
गुलिक काल
13:44 – 15:04

2 दिसंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:42 – 07:02टालें
चर07:02 – 08:23सामान्य
लाभ08:23 – 09:43शुभ
अमृत09:43 – 11:03शुभ
काल11:03 – 12:23टालें
शुभ12:23 – 13:44शुभ
रोग13:44 – 15:04टालें
उद्वेग15:04 – 16:24टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ16:24 – 18:04शुभ
अमृत18:04 – 19:44शुभ
चर19:44 – 21:24सामान्य
रोग21:24 – 23:03टालें
काल23:03 – 00:43टालें
लाभ00:43 – 02:23शुभ
उद्वेग02:23 – 04:03टालें
शुभ04:03 – 05:43शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4206:35दिन
शुक्र06:3507:29दिन
बुध07:2908:23दिन
चंद्र08:2309:16दिन
शनि09:1610:10दिन
गुरु10:1011:03दिन
मंगल11:0311:57दिन
सूर्य11:5712:50दिन
शुक्र12:5013:44दिन
बुध13:4414:37दिन
चंद्र14:3715:31दिन
शनि15:3116:24दिन
गुरु16:2417:31रात
मंगल17:3118:37रात
सूर्य18:3719:44रात
शुक्र19:4420:50रात
बुध20:5021:57रात
चंद्र21:5723:03रात
शनि23:0300:10रात
गुरु00:1001:16रात
मंगल01:1602:23रात
सूर्य02:2303:30रात
शुक्र03:3004:36रात
बुध04:3605:43रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
5 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
9 दिस॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 दिस॰ 2029धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
25 दिस॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 दिस॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
31 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां इम्फाल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2750° (लाहिड़ी)। समय इम्फाल (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।