15 नवंबर 2027 को इंदौर का पंचांग

सोमवार, 15 नवंबर 2027, इंदौर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 15 नवंबर 2027 को इंदौर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (07:28 तक), नक्षत्र कृत्तिका (07:06 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 06:39 पर और सूर्यास्त 17:42 पर है। राहुकाल 08:02 से 09:25 तक है।

दिन और रात
दिन 06:39 – 17:42
रात 06:39 तक
तिथि
द्वितीया, 05:41 तक
नक्षत्र
रोहिणी, 06:00 तक
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 नवंबर 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 07:28 तक
कृष्ण द्वितीया 05:41, 16 नव॰ तक
कृष्ण तृतीया 03:42, 17 नव॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 06:00, 16 नव॰ तक
मृगशिरा 04:42, 17 नव॰ तक
योग
परिघअशुभ 15:21 तक
शिव 12:39, 16 नव॰ तक
करण
कौलव 07:28 तक
तैतिल 18:37 तक
गर 05:41, 16 नव॰ तक
वणिज 16:43, 16 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:39
सूर्यास्त
17:42
चंद्रोदय
18:37
चंद्रास्त
07:42
दिनमान
11h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:55 – 05:47
अभिजीत मुहूर्त
11:48 – 12:33

अशुभ समय

राहुकाल
08:02 – 09:25
यमगंड
10:48 – 12:10
गुलिक काल
13:33 – 14:56

15 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:39 – 08:02शुभ
काल08:02 – 09:25टालें
शुभ09:25 – 10:48शुभ
रोग10:48 – 12:10टालें
उद्वेग12:10 – 13:33टालें
चर13:33 – 14:56सामान्य
लाभ14:56 – 16:19शुभ
अमृत16:19 – 17:42शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:42 – 19:19सामान्य
रोग19:19 – 20:57टालें
काल20:57 – 22:34टालें
लाभ22:34 – 00:11शुभ
उद्वेग00:11 – 01:48टालें
शुभ01:48 – 03:25शुभ
अमृत03:25 – 05:02शुभ
चर05:02 – 06:39सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:3907:34दिन
शनि07:3408:29दिन
गुरु08:2909:25दिन
मंगल09:2510:20दिन
सूर्य10:2011:15दिन
शुक्र11:1512:10दिन
बुध12:1013:06दिन
चंद्र13:0614:01दिन
शनि14:0114:56दिन
गुरु14:5615:52दिन
मंगल15:5216:47दिन
सूर्य16:4717:42दिन
शुक्र17:4218:47रात
बुध18:4719:52रात
चंद्र19:5220:57रात
शनि20:5722:01रात
गुरु22:0123:06रात
मंगल23:0600:11रात
सूर्य00:1101:16रात
शुक्र01:1602:20रात
बुध02:2003:25रात
चंद्र03:2504:30रात
शनि04:3005:35रात
गुरु05:3506:39रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
2 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 दिस॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 दिस॰ 2027मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां इंदौर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2464° (लाहिड़ी)। समय इंदौर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।