15 मार्च 2028 को इंदौर का पंचांग

बुधवार, 15 मार्च 2028, इंदौर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 15 मार्च 2028 को इंदौर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (16:52 तक), नक्षत्र विशाखा (20:45 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 18:35 पर है। राहुकाल 12:35 से 14:05 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 18:35
रात 06:34 तक
तिथि
पंचमी, 16:52 तक
षष्ठी
नक्षत्र
विशाखा, 20:45 तक
अनुराधा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 मार्च 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 16:52 तक
कृष्ण षष्ठी 16:12, 16 मार्च तक
नक्षत्र
विशाखा 20:45 तक
अनुराधा 20:54, 16 मार्च तक
योग
हर्षण 00:06, 16 मार्च तक
वज्रअशुभ 22:39, 16 मार्च तक
करण
तैतिल 16:52 तक
गर 04:25, 16 मार्च तक
वणिज 16:12, 16 मार्च तक
चंद्र राशि
तुला 14:50 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
18:35
चंद्रोदय
23:18
चंद्रास्त
09:21
दिनमान
12h 1m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:59 – 05:47
अभिजीत मुहूर्त
12:11 – 12:59 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:35 – 14:05
यमगंड
08:05 – 09:35
गुलिक काल
11:05 – 12:35

15 मार्च 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:35 – 08:05शुभ
अमृत08:05 – 09:35शुभ
काल09:35 – 11:05टालें
शुभ11:05 – 12:35शुभ
रोग12:35 – 14:05टालें
उद्वेग14:05 – 15:35टालें
चर15:35 – 17:05सामान्य
लाभ17:05 – 18:35शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:35 – 20:05टालें
शुभ20:05 – 21:35शुभ
अमृत21:35 – 23:05शुभ
चर23:05 – 00:35सामान्य
रोग00:35 – 02:04टालें
काल02:04 – 03:34टालें
लाभ03:34 – 05:04शुभ
उद्वेग05:04 – 06:34टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3507:35दिन
चंद्र07:3508:35दिन
शनि08:3509:35दिन
गुरु09:3510:35दिन
मंगल10:3511:35दिन
सूर्य11:3512:35दिन
शुक्र12:3513:35दिन
बुध13:3514:35दिन
चंद्र14:3515:35दिन
शनि15:3516:35दिन
गुरु16:3517:35दिन
मंगल17:3518:35दिन
सूर्य18:3519:35रात
शुक्र19:3520:35रात
बुध20:3521:35रात
चंद्र21:3522:35रात
शनि22:3523:35रात
गुरु23:3500:35रात
मंगल00:3501:34रात
सूर्य01:3402:34रात
शुक्र02:3403:34रात
बुध03:3404:34रात
चंद्र04:3405:34रात
शनि05:3406:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 मार्च 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 मार्च 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 मार्च 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 मार्च 2028चैत्र अमावस्याअमावस्या
30 मार्च 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 अप्रैल 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अप्रैल 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अप्रैल 2028चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
13 अप्रैल 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 अप्रैल 2028मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश

तिथियां इंदौर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2510° (लाहिड़ी)। समय इंदौर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।