21 जुलाई 2025 को जयपुर का पंचांग

सोमवार, 21 जुलाई 2025, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 21 जुलाई 2025 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (09:39 तक), नक्षत्र रोहिणी (21:07 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 05:45 पर और सूर्यास्त 19:20 पर है। राहुकाल 07:27 से 09:09 तक है।

दिन और रात
दिन 05:45 – 19:20
रात 05:46 तक
तिथि
एकादशी, 09:39 तक
द्वादशी
नक्षत्र
रोहिणी, 21:07 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 जुलाई 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 09:39 तक
कृष्ण द्वादशी 07:06, 22 जुल॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 21:07 तक
मृगशिरा 19:24, 22 जुल॰ तक
योग
वृद्धि 18:38 तक
ध्रुव 15:32, 22 जुल॰ तक
करण
बालव 09:39 तक
कौलव 20:22 तक
तैतिल 07:06, 22 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:45
सूर्यास्त
19:20
चंद्रोदय
01:46
चंद्रास्त
16:20
दिनमान
13h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:22 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
12:05 – 13:00

अशुभ समय

राहुकाल
07:27 – 09:09
यमगंड
10:51 – 12:33
गुलिक काल
14:15 – 15:56

21 जुलाई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:45 – 07:27शुभ
काल07:27 – 09:09टालें
शुभ09:09 – 10:51शुभ
रोग10:51 – 12:33टालें
उद्वेग12:33 – 14:15टालें
चर14:15 – 15:56सामान्य
लाभ15:56 – 17:38शुभ
अमृत17:38 – 19:20शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:20 – 20:38सामान्य
रोग20:38 – 21:57टालें
काल21:57 – 23:15टालें
लाभ23:15 – 00:33शुभ
उद्वेग00:33 – 01:51टालें
शुभ01:51 – 03:09शुभ
अमृत03:09 – 04:27शुभ
चर04:27 – 05:46सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:4506:53दिन
शनि06:5308:01दिन
गुरु08:0109:09दिन
मंगल09:0910:17दिन
सूर्य10:1711:25दिन
शुक्र11:2512:33दिन
बुध12:3313:41दिन
चंद्र13:4114:49दिन
शनि14:4915:56दिन
गुरु15:5617:04दिन
मंगल17:0418:12दिन
सूर्य18:1219:20दिन
शुक्र19:2020:12रात
बुध20:1221:04रात
चंद्र21:0421:57रात
शनि21:5722:49रात
गुरु22:4923:41रात
मंगल23:4100:33रात
सूर्य00:3301:25रात
शुक्र01:2502:17रात
बुध02:1703:09रात
चंद्र03:0904:01रात
शनि04:0104:53रात
गुरु04:5305:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 जुल॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 जुल॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 जुल॰ 2025श्रावण अमावस्याअमावस्या
28 जुल॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 अग॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अग॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अग॰ 2025श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
13 अग॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 अग॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अग॰ 2025सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2140° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।