1 अगस्त 2025 को जयपुर का पंचांग

शुक्रवार, 1 अगस्त 2025, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 1 अगस्त 2025 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (07:23, 2 अग॰ तक), नक्षत्र स्वाति (03:40, 2 अग॰ तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 05:51 पर और सूर्यास्त 19:14 पर है। राहुकाल 10:52 से 12:33 तक है।

दिन और रात
दिन 05:51 – 19:14
रात 05:51 तक
तिथि
अष्टमी
नक्षत्र
स्वाति, 03:40 तक
विशाखा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 अगस्त 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 07:23, 2 अग॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 03:40, 2 अग॰ तक
विशाखा 06:35, 3 अग॰ तक
योग
शुभ 05:30, 2 अग॰ तक
शुक्ल 06:24, 3 अग॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 18:11 तक
बव 07:23, 2 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:51
सूर्यास्त
19:14
चंद्रोदय
12:35
चंद्रास्त
23:36
दिनमान
13h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:26 – 05:08
अभिजीत मुहूर्त
12:06 – 12:59

अशुभ समय

राहुकाल
10:52 – 12:33
यमगंड
15:53 – 17:34
गुलिक काल
07:31 – 09:12

1 अगस्त 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:51 – 07:31सामान्य
लाभ07:31 – 09:12शुभ
अमृत09:12 – 10:52शुभ
काल10:52 – 12:33टालें
शुभ12:33 – 14:13शुभ
रोग14:13 – 15:53टालें
उद्वेग15:53 – 17:34टालें
चर17:34 – 19:14सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:14 – 20:34टालें
काल20:34 – 21:54टालें
लाभ21:54 – 23:13शुभ
उद्वेग23:13 – 00:33टालें
शुभ00:33 – 01:52शुभ
अमृत01:52 – 03:12शुभ
चर03:12 – 04:32सामान्य
रोग04:32 – 05:51टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5106:58दिन
बुध06:5808:05दिन
चंद्र08:0509:12दिन
शनि09:1210:19दिन
गुरु10:1911:26दिन
मंगल11:2612:33दिन
सूर्य12:3313:40दिन
शुक्र13:4014:46दिन
बुध14:4615:53दिन
चंद्र15:5317:00दिन
शनि17:0018:07दिन
गुरु18:0719:14दिन
मंगल19:1420:07रात
सूर्य20:0721:00रात
शुक्र21:0021:54रात
बुध21:5422:47रात
चंद्र22:4723:40रात
शनि23:4000:33रात
गुरु00:3301:26रात
मंगल01:2602:19रात
सूर्य02:1903:12रात
शुक्र03:1204:05रात
बुध04:0504:58रात
चंद्र04:5805:51रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 अग॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अग॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अग॰ 2025श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
13 अग॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 अग॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अग॰ 2025सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 अग॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 अग॰ 2025भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
27 अग॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2144° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।