2 अगस्त 2027 को जयपुर का पंचांग

सोमवार, 2 अगस्त 2027, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 2 अगस्त 2027 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (15:35 तक), नक्षत्र पुष्य (17:09 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:51 पर और सूर्यास्त 19:14 पर है। राहुकाल 07:31 से 09:12 तक है।

दिन और रात
दिन 05:51 – 19:14
रात 05:52 तक
तिथि
अमावस्या, 15:35 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
पुष्य, 17:09 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 अगस्त 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
अमावस्या 15:35 तक
शुक्ल प्रतिपदा 11:51, 3 अग॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 17:09 तक
आश्लेषा 14:16, 3 अग॰ तक
योग
सिद्धि 18:32 तक
व्यतीपातअशुभ 14:24, 3 अग॰ तक
करण
नाग 15:35 तक
किंस्तुघ्न 01:42, 3 अग॰ तक
बव 11:51, 3 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:51
सूर्यास्त
19:14
चंद्रोदय
05:27
चंद्रास्त
19:16
दिनमान
13h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:26 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
12:06 – 12:59

अशुभ समय

राहुकाल
07:31 – 09:12
यमगंड
10:52 – 12:33
गुलिक काल
14:13 – 15:53

2 अगस्त 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:51 – 07:31शुभ
काल07:31 – 09:12टालें
शुभ09:12 – 10:52शुभ
रोग10:52 – 12:33टालें
उद्वेग12:33 – 14:13टालें
चर14:13 – 15:53सामान्य
लाभ15:53 – 17:34शुभ
अमृत17:34 – 19:14शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:14 – 20:34सामान्य
रोग20:34 – 21:53टालें
काल21:53 – 23:13टालें
लाभ23:13 – 00:33शुभ
उद्वेग00:33 – 01:52टालें
शुभ01:52 – 03:12शुभ
अमृत03:12 – 04:32शुभ
चर04:32 – 05:52सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:5106:58दिन
शनि06:5808:05दिन
गुरु08:0509:12दिन
मंगल09:1210:19दिन
सूर्य10:1911:26दिन
शुक्र11:2612:33दिन
बुध12:3313:39दिन
चंद्र13:3914:46दिन
शनि14:4615:53दिन
गुरु15:5317:00दिन
मंगल17:0018:07दिन
सूर्य18:0719:14दिन
शुक्र19:1420:07रात
बुध20:0721:00रात
चंद्र21:0021:53रात
शनि21:5322:46रात
गुरु22:4623:40रात
मंगल23:4000:33रात
सूर्य00:3301:26रात
शुक्र01:2602:19रात
बुध02:1903:12रात
चंद्र03:1204:05रात
शनि04:0504:58रात
गुरु04:5805:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 अग॰ 2027श्रावण अमावस्याअमावस्या
5 अग॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 अग॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 अग॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 अग॰ 2027श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
17 अग॰ 2027सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
21 अग॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
25 अग॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
28 अग॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
30 अग॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
31 अग॰ 2027भाद्रपद अमावस्याअमावस्या

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2424° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।