28 मई 2029 को जयपुर का पंचांग

सोमवार, 28 मई 2029, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 28 मई 2029 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (21:20 तक), नक्षत्र अनुराधा (06:59 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 05:33 पर और सूर्यास्त 19:14 पर है। राहुकाल 07:16 से 08:59 तक है।

दिन और रात
दिन 05:33 – 19:14
रात 05:33 तक
तिथि
प्रतिपदा, 21:20 तक
द्वितीया
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 05:09 तक
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 मई 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 21:20 तक
कृष्ण द्वितीया 19:02, 29 मई तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 05:09, 29 मई तक
मूल 03:51, 30 मई तक
योग
सिद्ध 23:26 तक
साध्य 20:32, 29 मई तक
करण
बालव 10:40 तक
कौलव 21:20 तक
तैतिल 08:07, 29 मई तक
चंद्र राशि
वृश्चिक 05:09, 29 मई तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:33
सूर्यास्त
19:14
चंद्रोदय
20:06
चंद्रास्त
05:42
दिनमान
13h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:11 – 04:52
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:51

अशुभ समय

राहुकाल
07:16 – 08:59
यमगंड
10:41 – 12:24
गुलिक काल
14:06 – 15:49

28 मई 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:33 – 07:16शुभ
काल07:16 – 08:59टालें
शुभ08:59 – 10:41शुभ
रोग10:41 – 12:24टालें
उद्वेग12:24 – 14:06टालें
चर14:06 – 15:49सामान्य
लाभ15:49 – 17:31शुभ
अमृत17:31 – 19:14शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:14 – 20:31सामान्य
रोग20:31 – 21:49टालें
काल21:49 – 23:06टालें
लाभ23:06 – 00:24शुभ
उद्वेग00:24 – 01:41टालें
शुभ01:41 – 02:58शुभ
अमृत02:58 – 04:16शुभ
चर04:16 – 05:33सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:3306:42दिन
शनि06:4207:50दिन
गुरु07:5008:59दिन
मंगल08:5910:07दिन
सूर्य10:0711:15दिन
शुक्र11:1512:24दिन
बुध12:2413:32दिन
चंद्र13:3214:41दिन
शनि14:4115:49दिन
गुरु15:4916:57दिन
मंगल16:5718:06दिन
सूर्य18:0619:14दिन
शुक्र19:1420:06रात
बुध20:0620:57रात
चंद्र20:5721:49रात
शनि21:4922:40रात
गुरु22:4023:32रात
मंगल23:3200:24रात
सूर्य00:2401:15रात
शुक्र01:1502:07रात
बुध02:0702:58रात
चंद्र02:5803:50रात
शनि03:5004:42रात
गुरु04:4205:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 मई 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 जून 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 जून 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 जून 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 जून 2029ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
15 जून 2029मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जून 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
22 जून 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 जून 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 जून 2029ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2678° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।