13 जुलाई 2029 को जयपुर का पंचांग

शुक्रवार, 13 जुलाई 2029, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 13 जुलाई 2029 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (19:13 तक), नक्षत्र पुष्य (11:19 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:41 पर और सूर्यास्त 19:23 पर है। राहुकाल 10:49 से 12:32 तक है।

दिन और रात
दिन 05:41 – 19:23
रात 05:42 तक
तिथि
द्वितीया, 19:13 तक
तृतीया
नक्षत्र
पुष्य, 11:19 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 जुलाई 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 19:13 तक
शुक्ल तृतीया 17:33, 14 जुल॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 11:19 तक
आश्लेषा 10:32, 14 जुल॰ तक
योग
वज्रअशुभ 21:54 तक
सिद्धि 19:29, 14 जुल॰ तक
करण
बालव 07:55 तक
कौलव 19:13 तक
तैतिल 06:25, 14 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:41
सूर्यास्त
19:23
चंद्रोदय
07:11
चंद्रास्त
20:35
दिनमान
13h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:19 – 05:00
अभिजीत मुहूर्त
12:05 – 12:59

अशुभ समय

राहुकाल
10:49 – 12:32
यमगंड
15:57 – 17:40
गुलिक काल
07:24 – 09:07

13 जुलाई 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:41 – 07:24सामान्य
लाभ07:24 – 09:07शुभ
अमृत09:07 – 10:49शुभ
काल10:49 – 12:32टालें
शुभ12:32 – 14:15शुभ
रोग14:15 – 15:57टालें
उद्वेग15:57 – 17:40टालें
चर17:40 – 19:23सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:23 – 20:40टालें
काल20:40 – 21:58टालें
लाभ21:58 – 23:15शुभ
उद्वेग23:15 – 00:32टालें
शुभ00:32 – 01:50शुभ
अमृत01:50 – 03:07शुभ
चर03:07 – 04:24सामान्य
रोग04:24 – 05:42टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:4106:50दिन
बुध06:5007:58दिन
चंद्र07:5809:07दिन
शनि09:0710:15दिन
गुरु10:1511:24दिन
मंगल11:2412:32दिन
सूर्य12:3213:41दिन
शुक्र13:4114:49दिन
बुध14:4915:57दिन
चंद्र15:5717:06दिन
शनि17:0618:14दिन
गुरु18:1419:23दिन
मंगल19:2320:14रात
सूर्य20:1421:06रात
शुक्र21:0621:58रात
बुध21:5822:49रात
चंद्र22:4923:41रात
शनि23:4100:32रात
गुरु00:3201:24रात
मंगल01:2402:15रात
सूर्य02:1503:07रात
शुक्र03:0703:59रात
बुध03:5904:50रात
चंद्र04:5005:42रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 जुल॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 जुल॰ 2029कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुल॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 जुल॰ 2029आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
29 जुल॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 अग॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अग॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अग॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अग॰ 2029श्रावण अमावस्याअमावस्या

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2696° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।