17 जनवरी 2028 को जामनगर का पंचांग

सोमवार, 17 जनवरी 2028, जामनगर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 17 जनवरी 2028 को जामनगर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (15:12 तक), नक्षत्र हस्त (06:19, 18 जन॰ तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 07:31 पर और सूर्यास्त 18:27 पर है। राहुकाल 08:53 से 10:15 तक है।

दिन और रात
दिन 07:31 – 18:27
रात 07:31 तक
तिथि
षष्ठी, 15:12 तक
सप्तमी
नक्षत्र
हस्त, 06:19 तक
चित्रा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 जनवरी 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 15:12 तक
कृष्ण सप्तमी 13:32, 18 जन॰ तक
नक्षत्र
हस्त 06:19, 18 जन॰ तक
चित्रा 05:43, 19 जन॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 19:52 तक
सुकर्मा 17:23, 18 जन॰ तक
करण
वणिज 15:12 तक
विष्टि (भद्रा) 02:17, 18 जन॰ तक
बव 13:32, 18 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:31
सूर्यास्त
18:27
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
11:08
दिनमान
10h 56m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:47 – 06:39
अभिजीत मुहूर्त
12:37 – 13:21

अशुभ समय

राहुकाल
08:53 – 10:15
यमगंड
11:37 – 12:59
गुलिक काल
14:21 – 15:43

17 जनवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:31 – 08:53शुभ
काल08:53 – 10:15टालें
शुभ10:15 – 11:37शुभ
रोग11:37 – 12:59टालें
उद्वेग12:59 – 14:21टालें
चर14:21 – 15:43सामान्य
लाभ15:43 – 17:05शुभ
अमृत17:05 – 18:27शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:27 – 20:05सामान्य
रोग20:05 – 21:43टालें
काल21:43 – 23:21टालें
लाभ23:21 – 00:59शुभ
उद्वेग00:59 – 02:37टालें
शुभ02:37 – 04:15शुभ
अमृत04:15 – 05:53शुभ
चर05:53 – 07:31सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:3108:26दिन
शनि08:2609:21दिन
गुरु09:2110:15दिन
मंगल10:1511:10दिन
सूर्य11:1012:05दिन
शुक्र12:0512:59दिन
बुध12:5913:54दिन
चंद्र13:5414:48दिन
शनि14:4815:43दिन
गुरु15:4316:38दिन
मंगल16:3817:32दिन
सूर्य17:3218:27दिन
शुक्र18:2719:32रात
बुध19:3220:38रात
चंद्र20:3821:43रात
शनि21:4322:48रात
गुरु22:4823:54रात
मंगल23:5400:59रात
सूर्य00:5902:05रात
शुक्र02:0503:10रात
बुध03:1004:15रात
चंद्र04:1505:21रात
शनि05:2106:26रात
गुरु06:2607:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 जन॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
22 जन॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 जन॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 जन॰ 2028माघ अमावस्याअमावस्या
30 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 फ़र॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 फ़र॰ 2028माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 फ़र॰ 2028कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश

तिथियां जामनगर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2488° (लाहिड़ी)। समय जामनगर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।