31 जनवरी 2029 को जूनागढ़ का पंचांग

बुधवार, 31 जनवरी 2029, जूनागढ़, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 31 जनवरी 2029 को जूनागढ़ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (08:49 तक), नक्षत्र आश्लेषा (10:01 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 07:26 पर और सूर्यास्त 18:37 पर है। राहुकाल 13:01 से 14:25 तक है।

दिन और रात
दिन 07:26 – 18:37
रात 07:25 तक
तिथि
द्वितीया, 05:50 तक
तृतीया
नक्षत्र
मघा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 जनवरी 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 08:49 तक
कृष्ण द्वितीया 05:50, 1 फ़र॰ तक
कृष्ण तृतीया 02:45, 2 फ़र॰ तक
नक्षत्र
मघा 07:45, 1 फ़र॰ तक
योग
सौभाग्य 19:13 तक
शोभन 15:30, 1 फ़र॰ तक
करण
कौलव 08:49 तक
तैतिल 19:20 तक
गर 05:50, 1 फ़र॰ तक
वणिज 16:17, 1 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 10:01 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:26
सूर्यास्त
18:37
चंद्रोदय
19:56
चंद्रास्त
07:59
दिनमान
11h 11m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:43 – 06:34
अभिजीत मुहूर्त
12:39 – 13:24 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
13:01 – 14:25
यमगंड
08:49 – 10:13
गुलिक काल
11:37 – 13:01

31 जनवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:26 – 08:49शुभ
अमृत08:49 – 10:13शुभ
काल10:13 – 11:37टालें
शुभ11:37 – 13:01शुभ
रोग13:01 – 14:25टालें
उद्वेग14:25 – 15:49टालें
चर15:49 – 17:13सामान्य
लाभ17:13 – 18:37शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:37 – 20:13टालें
शुभ20:13 – 21:49शुभ
अमृत21:49 – 23:25शुभ
चर23:25 – 01:01सामान्य
रोग01:01 – 02:37टालें
काल02:37 – 04:13टालें
लाभ04:13 – 05:49शुभ
उद्वेग05:49 – 07:25टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:2608:21दिन
चंद्र08:2109:17दिन
शनि09:1710:13दिन
गुरु10:1311:09दिन
मंगल11:0912:05दिन
सूर्य12:0513:01दिन
शुक्र13:0113:57दिन
बुध13:5714:53दिन
चंद्र14:5315:49दिन
शनि15:4916:45दिन
गुरु16:4517:41दिन
मंगल17:4118:37दिन
सूर्य18:3719:41रात
शुक्र19:4120:45रात
बुध20:4521:49रात
चंद्र21:4922:53रात
शनि22:5323:57रात
गुरु23:5701:01रात
मंगल01:0102:05रात
सूर्य02:0503:09रात
शुक्र03:0904:13रात
बुध04:1305:17रात
चंद्र05:1706:21रात
शनि06:2107:25रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 फ़र॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 फ़र॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 फ़र॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
13 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 फ़र॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2029फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां जूनागढ़ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2633° (लाहिड़ी)। समय जूनागढ़ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।