13 सितंबर 2029 को जूनागढ़ का पंचांग

गुरुवार, 13 सितंबर 2029, जूनागढ़, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 13 सितंबर 2029 को जूनागढ़ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (21:40 तक), नक्षत्र विशाखा (12:19 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:34 पर और सूर्यास्त 18:53 पर है। राहुकाल 14:16 से 15:48 तक है।

दिन और रात
दिन 06:34 – 18:53
रात 06:34 तक
तिथि
षष्ठी, 21:40 तक
सप्तमी
नक्षत्र
विशाखा, 12:19 तक
अनुराधा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 सितंबर 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 21:40 तक
शुक्ल सप्तमी 19:44, 14 सित॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 12:19 तक
अनुराधा 10:56, 14 सित॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 12:34 तक
विष्कंभअशुभ 09:43, 14 सित॰ तक
करण
कौलव 10:49 तक
तैतिल 21:40 तक
गर 08:38, 14 सित॰ तक
चंद्र राशि
तुला 06:44 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:34
सूर्यास्त
18:53
चंद्रोदय
11:32
चंद्रास्त
22:41
दिनमान
12h 18m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:01 – 05:47
अभिजीत मुहूर्त
12:19 – 13:08

अशुभ समय

राहुकाल
14:16 – 15:48
यमगंड
06:34 – 08:06
गुलिक काल
09:39 – 11:11

13 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:34 – 08:06शुभ
रोग08:06 – 09:39टालें
उद्वेग09:39 – 11:11टालें
चर11:11 – 12:43सामान्य
लाभ12:43 – 14:16शुभ
अमृत14:16 – 15:48शुभ
काल15:48 – 17:20टालें
शुभ17:20 – 18:53शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:53 – 20:20शुभ
चर20:20 – 21:48सामान्य
रोग21:48 – 23:16टालें
काल23:16 – 00:44टालें
लाभ00:44 – 02:11शुभ
उद्वेग02:11 – 03:39टालें
शुभ03:39 – 05:07शुभ
अमृत05:07 – 06:34शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:3407:36दिन
मंगल07:3608:37दिन
सूर्य08:3709:39दिन
शुक्र09:3910:40दिन
बुध10:4011:42दिन
चंद्र11:4212:43दिन
शनि12:4313:45दिन
गुरु13:4514:46दिन
मंगल14:4615:48दिन
सूर्य15:4816:50दिन
शुक्र16:5017:51दिन
बुध17:5118:53दिन
चंद्र18:5319:51रात
शनि19:5120:50रात
गुरु20:5021:48रात
मंगल21:4822:47रात
सूर्य22:4723:45रात
शुक्र23:4500:44रात
बुध00:4401:42रात
चंद्र01:4202:40रात
शनि02:4003:39रात
गुरु03:3904:37रात
मंगल04:3705:36रात
सूर्य05:3606:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 सित॰ 2029कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 सित॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 सित॰ 2029भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
26 सित॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां जूनागढ़ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2719° (लाहिड़ी)। समय जूनागढ़ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।