15 जनवरी 2025 को कटरा (वैष्णो देवी) का पंचांग

बुधवार, 15 जनवरी 2025, कटरा (वैष्णो देवी), भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 15 जनवरी 2025 को कटरा (वैष्णो देवी) में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (03:23, 16 जन॰ तक), नक्षत्र पुष्य (10:28 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 07:33 पर और सूर्यास्त 17:46 पर है। राहुकाल 12:39 से 13:56 तक है।

दिन और रात
दिन 07:33 – 17:46
रात 07:33 तक
तिथि
द्वितीया, 03:23 तक
तृतीया
नक्षत्र
पुष्य, 10:28 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 जनवरी 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 03:23, 16 जन॰ तक
कृष्ण तृतीया 04:06, 17 जन॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 10:28 तक
आश्लेषा 11:16, 16 जन॰ तक
योग
प्रीति 01:46, 16 जन॰ तक
आयुष्मान 01:05, 17 जन॰ तक
करण
तैतिल 15:17 तक
गर 03:23, 16 जन॰ तक
वणिज 15:39, 16 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:33
सूर्यास्त
17:46
चंद्रोदय
19:13
चंद्रास्त
08:43
दिनमान
10h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:42 – 06:38
अभिजीत मुहूर्त
12:19 – 13:00 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:39 – 13:56
यमगंड
08:49 – 10:06
गुलिक काल
11:23 – 12:39

15 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:33 – 08:49शुभ
अमृत08:49 – 10:06शुभ
काल10:06 – 11:23टालें
शुभ11:23 – 12:39शुभ
रोग12:39 – 13:56टालें
उद्वेग13:56 – 15:13टालें
चर15:13 – 16:29सामान्य
लाभ16:29 – 17:46शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:46 – 19:29टालें
शुभ19:29 – 21:13शुभ
अमृत21:13 – 22:56शुभ
चर22:56 – 00:39सामान्य
रोग00:39 – 02:23टालें
काल02:23 – 04:06टालें
लाभ04:06 – 05:49शुभ
उद्वेग05:49 – 07:33टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:3308:24दिन
चंद्र08:2409:15दिन
शनि09:1510:06दिन
गुरु10:0610:57दिन
मंगल10:5711:48दिन
सूर्य11:4812:39दिन
शुक्र12:3913:30दिन
बुध13:3014:21दिन
चंद्र14:2115:13दिन
शनि15:1316:04दिन
गुरु16:0416:55दिन
मंगल16:5517:46दिन
सूर्य17:4618:55रात
शुक्र18:5520:04रात
बुध20:0421:13रात
चंद्र21:1322:21रात
शनि22:2123:30रात
गुरु23:3000:39रात
मंगल00:3901:48रात
सूर्य01:4802:57रात
शुक्र02:5704:06रात
बुध04:0605:15रात
चंद्र05:1506:24रात
शनि06:2407:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 जन॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
2 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
12 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश

तिथियां कटरा (वैष्णो देवी) में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2068° (लाहिड़ी)। समय कटरा (वैष्णो देवी) (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।