5 जनवरी 2026 को कटरा (वैष्णो देवी) का पंचांग

सोमवार, 5 जनवरी 2026, कटरा (वैष्णो देवी), भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 5 जनवरी 2026 को कटरा (वैष्णो देवी) में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (09:57 तक), नक्षत्र पुष्य (13:25 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 07:33 पर और सूर्यास्त 17:37 पर है। राहुकाल 08:49 से 10:04 तक है।

दिन और रात
दिन 07:33 – 17:37
रात 07:33 तक
तिथि
तृतीया
नक्षत्र
पुष्य, 13:25 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 जनवरी 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 09:57 तक
कृष्ण तृतीया 08:02, 6 जन॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 13:25 तक
आश्लेषा 12:17, 6 जन॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 22:47 तक
प्रीति 20:21, 6 जन॰ तक
करण
गर 09:57 तक
वणिज 20:54 तक
विष्टि (भद्रा) 08:02, 6 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:33
सूर्यास्त
17:37
चंद्रोदय
19:51
चंद्रास्त
09:13
दिनमान
10h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:42 – 06:37
अभिजीत मुहूर्त
12:15 – 12:55

अशुभ समय

राहुकाल
08:49 – 10:04
यमगंड
11:20 – 12:35
गुलिक काल
13:51 – 15:06

5 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:33 – 08:49शुभ
काल08:49 – 10:04टालें
शुभ10:04 – 11:20शुभ
रोग11:20 – 12:35टालें
उद्वेग12:35 – 13:51टालें
चर13:51 – 15:06सामान्य
लाभ15:06 – 16:22शुभ
अमृत16:22 – 17:37शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:37 – 19:22सामान्य
रोग19:22 – 21:06टालें
काल21:06 – 22:51टालें
लाभ22:51 – 00:35शुभ
उद्वेग00:35 – 02:20टालें
शुभ02:20 – 04:04शुभ
अमृत04:04 – 05:49शुभ
चर05:49 – 07:33सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:3308:24दिन
शनि08:2409:14दिन
गुरु09:1410:04दिन
मंगल10:0410:55दिन
सूर्य10:5511:45दिन
शुक्र11:4512:35दिन
बुध12:3513:25दिन
चंद्र13:2514:16दिन
शनि14:1615:06दिन
गुरु15:0615:56दिन
मंगल15:5616:47दिन
सूर्य16:4717:37दिन
शुक्र17:3718:47रात
बुध18:4719:56रात
चंद्र19:5621:06रात
शनि21:0622:16रात
गुरु22:1623:25रात
मंगल23:2500:35रात
सूर्य00:3501:45रात
शुक्र01:4502:55रात
बुध02:5504:04रात
चंद्र04:0405:14रात
शनि05:1406:24रात
गुरु06:2407:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 जन॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 जन॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 जन॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जन॰ 2026मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 जन॰ 2026माघ अमावस्याअमावस्या
22 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 फ़र॰ 2026माघ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां कटरा (वैष्णो देवी) में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2204° (लाहिड़ी)। समय कटरा (वैष्णो देवी) (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।