28 जनवरी 2028 को कोहिमा का पंचांग

शुक्रवार, 28 जनवरी 2028, कोहिमा, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 28 जनवरी 2028 को कोहिमा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (02:02, 29 जन॰ तक), नक्षत्र धनिष्ठा (22:56 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:59 पर और सूर्यास्त 16:53 पर है। राहुकाल 10:04 से 11:26 तक है।

दिन और रात
दिन 05:59 – 16:53
रात 05:58 तक
तिथि
द्वितीया, 02:02 तक
तृतीया
नक्षत्र
धनिष्ठा, 22:56 तक
शतभिषा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 जनवरी 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 02:02, 29 जन॰ तक
शुक्ल तृतीया 04:43, 30 जन॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 02:02, 30 जन॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 15:20 तक
वरीयान 16:18, 29 जन॰ तक
करण
बालव 12:40 तक
कौलव 02:02, 29 जन॰ तक
तैतिल 15:23, 29 जन॰ तक
चंद्र राशि
मकर 09:22 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:59
सूर्यास्त
16:53
चंद्रोदय
06:49
चंद्रास्त
18:25
दिनमान
10h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:14 – 05:06
अभिजीत मुहूर्त
11:04 – 11:48

अशुभ समय

राहुकाल
10:04 – 11:26
यमगंड
14:10 – 15:31
गुलिक काल
07:20 – 08:42

28 जनवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:59 – 07:20सामान्य
लाभ07:20 – 08:42शुभ
अमृत08:42 – 10:04शुभ
काल10:04 – 11:26टालें
शुभ11:26 – 12:48शुभ
रोग12:48 – 14:10टालें
उद्वेग14:10 – 15:31टालें
चर15:31 – 16:53सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग16:53 – 18:31टालें
काल18:31 – 20:10टालें
लाभ20:10 – 21:48शुभ
उद्वेग21:48 – 23:26टालें
शुभ23:26 – 01:04शुभ
अमृत01:04 – 02:42शुभ
चर02:42 – 04:20सामान्य
रोग04:20 – 05:58टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5906:53दिन
बुध06:5307:48दिन
चंद्र07:4808:42दिन
शनि08:4209:37दिन
गुरु09:3710:31दिन
मंगल10:3111:26दिन
सूर्य11:2612:21दिन
शुक्र12:2113:15दिन
बुध13:1514:10दिन
चंद्र14:1015:04दिन
शनि15:0415:59दिन
गुरु15:5916:53दिन
मंगल16:5317:59रात
सूर्य17:5919:04रात
शुक्र19:0420:10रात
बुध20:1021:15रात
चंद्र21:1522:20रात
शनि22:2023:26रात
गुरु23:2600:31रात
मंगल00:3101:37रात
सूर्य01:3702:42रात
शुक्र02:4203:47रात
बुध03:4704:53रात
चंद्र04:5305:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 फ़र॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 फ़र॰ 2028माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2028कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 फ़र॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 फ़र॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 फ़र॰ 2028फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां कोहिमा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2492° (लाहिड़ी)। समय कोहिमा (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।