5 सितंबर 2027 को कुरनूल का पंचांग

रविवार, 5 सितंबर 2027, कुरनूल, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 5 सितंबर 2027 को कुरनूल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (11:17 तक), नक्षत्र स्वाति (14:30 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:05 पर और सूर्यास्त 18:27 पर है। राहुकाल 16:55 से 18:27 तक है।

दिन और रात
दिन 06:05 – 18:27
रात 06:05 तक
तिथि
पंचमी, 11:17 तक
षष्ठी
नक्षत्र
स्वाति, 14:30 तक
विशाखा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 सितंबर 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 11:17 तक
शुक्ल षष्ठी 10:58, 6 सित॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 14:30 तक
विशाखा 14:59, 6 सित॰ तक
योग
ब्रह्म 06:06 तक
इंद्र 04:37, 6 सित॰ तक
वैधृतिअशुभ 03:48, 7 सित॰ तक
करण
बालव 11:17 तक
कौलव 23:01 तक
तैतिल 10:58, 6 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:05
सूर्यास्त
18:27
चंद्रोदय
10:17
चंद्रास्त
21:49
दिनमान
12h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:32 – 05:18
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:41

अशुभ समय

राहुकाल
16:55 – 18:27
यमगंड
12:16 – 13:49
गुलिक काल
15:22 – 16:55

5 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:05 – 07:38टालें
चर07:38 – 09:10सामान्य
लाभ09:10 – 10:43शुभ
अमृत10:43 – 12:16शुभ
काल12:16 – 13:49टालें
शुभ13:49 – 15:22शुभ
रोग15:22 – 16:55टालें
उद्वेग16:55 – 18:27टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:27 – 19:55शुभ
अमृत19:55 – 21:22शुभ
चर21:22 – 22:49सामान्य
रोग22:49 – 00:16टालें
काल00:16 – 01:43टालें
लाभ01:43 – 03:11शुभ
उद्वेग03:11 – 04:38टालें
शुभ04:38 – 06:05शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:0507:07दिन
शुक्र07:0708:09दिन
बुध08:0909:10दिन
चंद्र09:1010:12दिन
शनि10:1211:14दिन
गुरु11:1412:16दिन
मंगल12:1613:18दिन
सूर्य13:1814:20दिन
शुक्र14:2015:22दिन
बुध15:2216:24दिन
चंद्र16:2417:25दिन
शनि17:2518:27दिन
गुरु18:2719:25रात
मंगल19:2520:24रात
सूर्य20:2421:22रात
शुक्र21:2222:20रात
बुध22:2023:18रात
चंद्र23:1800:16रात
शनि00:1601:14रात
गुरु01:1402:12रात
मंगल02:1203:11रात
सूर्य03:1104:09रात
शुक्र04:0905:07रात
बुध05:0706:05रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 सित॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 सित॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 सित॰ 2027भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
17 सित॰ 2027कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
20 सित॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 सित॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 सित॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 सित॰ 2027आश्विन अमावस्याअमावस्या
3 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कुरनूल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2437° (लाहिड़ी)। समय कुरनूल (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।