13 जनवरी 2028 को लेस्टर का पंचांग

गुरुवार, 13 जनवरी 2028, लेस्टर, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

गुरुवार, 13 जनवरी 2028 को लेस्टर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (21:09 तक), नक्षत्र पुष्य (11:07 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 08:10 पर और सूर्यास्त 16:15 पर है। राहुकाल 13:13 से 14:14 तक है।

दिन और रात
दिन 08:10 – 16:15
रात 08:09 तक
तिथि
द्वितीया, 21:09 तक
तृतीया
नक्षत्र
पुष्य, 11:07 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
शुभ
रोग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 जनवरी 2028 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 21:09 तक
कृष्ण तृतीया 17:47, 14 जन॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 11:07 तक
आश्लेषा 08:26, 14 जन॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 08:21 तक
प्रीति 04:17, 14 जन॰ तक
आयुष्मान 00:21, 15 जन॰ तक
करण
तैतिल 10:53 तक
गर 21:09 तक
वणिज 07:27, 14 जन॰ तक
विष्टि (भद्रा) 17:47, 14 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
08:10
सूर्यास्त
16:15
चंद्रोदय
18:22
चंद्रास्त
08:56
दिनमान
8h 5m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
06:03 – 07:06
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:29

अशुभ समय

राहुकाल
13:13 – 14:14
यमगंड
08:10 – 09:11
गुलिक काल
10:11 – 11:12

13 जनवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ08:10 – 09:11शुभ
रोग09:11 – 10:11टालें
उद्वेग10:11 – 11:12टालें
चर11:12 – 12:13सामान्य
लाभ12:13 – 13:13शुभ
अमृत13:13 – 14:14शुभ
काल14:14 – 15:15टालें
शुभ15:15 – 16:15शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत16:15 – 18:15शुभ
चर18:15 – 20:14सामान्य
रोग20:14 – 22:13टालें
काल22:13 – 00:12टालें
लाभ00:12 – 02:12शुभ
उद्वेग02:12 – 04:11टालें
शुभ04:11 – 06:10शुभ
अमृत06:10 – 08:09शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु08:1008:51दिन
मंगल08:5109:31दिन
सूर्य09:3110:11दिन
शुक्र10:1110:52दिन
बुध10:5211:32दिन
चंद्र11:3212:13दिन
शनि12:1312:53दिन
गुरु12:5313:34दिन
मंगल13:3414:14दिन
सूर्य14:1414:54दिन
शुक्र14:5415:35दिन
बुध15:3516:15दिन
चंद्र16:1517:35रात
शनि17:3518:54रात
गुरु18:5420:14रात
मंगल20:1421:33रात
सूर्य21:3322:53रात
शुक्र22:5300:12रात
बुध00:1201:32रात
चंद्र01:3202:51रात
शनि02:5104:11रात
गुरु04:1105:30रात
मंगल05:3006:50रात
सूर्य06:5008:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जन॰ 2028मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
15 जन॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
18 जन॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 जन॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 जन॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 जन॰ 2028माघ अमावस्याअमावस्या
30 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 फ़र॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 फ़र॰ 2028माघ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां लेस्टर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2487° (लाहिड़ी)। समय लेस्टर (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।