30 अप्रैल 2025 को लंदन का पंचांग

बुधवार, 30 अप्रैल 2025, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

बुधवार, 30 अप्रैल 2025 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (09:42 तक), नक्षत्र रोहिणी (11:48 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 05:33 पर और सूर्यास्त 20:22 पर है। राहुकाल 12:58 से 14:49 तक है।

दिन और रात
दिन 05:33 – 20:22
रात 05:32 तक
तिथि
तृतीया, 09:42 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
रोहिणी, 11:48 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 अप्रैल 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 09:42 तक
शुक्ल चतुर्थी 06:54, 1 मई तक
नक्षत्र
रोहिणी 11:48 तक
मृगशिरा 09:50, 1 मई तक
योग
शोभन 07:31 तक
अतिगंडअशुभ 04:04, 1 मई तक
सुकर्मा 01:08, 2 मई तक
करण
गर 09:42 तक
वणिज 20:13 तक
विष्टि (भद्रा) 06:54, 1 मई तक
चंद्र राशि
वृषभ 22:44 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:33
सूर्यास्त
20:22
चंद्रोदय
06:34
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
14h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:20 – 04:57
अभिजीत मुहूर्त
12:28 – 13:27 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:58 – 14:49
यमगंड
07:25 – 09:16
गुलिक काल
11:07 – 12:58

30 अप्रैल 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:33 – 07:25शुभ
अमृत07:25 – 09:16शुभ
काल09:16 – 11:07टालें
शुभ11:07 – 12:58शुभ
रोग12:58 – 14:49टालें
उद्वेग14:49 – 16:40टालें
चर16:40 – 18:31सामान्य
लाभ18:31 – 20:22शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग20:22 – 21:31टालें
शुभ21:31 – 22:39शुभ
अमृत22:39 – 23:48शुभ
चर23:48 – 00:57सामान्य
रोग00:57 – 02:05टालें
काल02:05 – 03:14टालें
लाभ03:14 – 04:23शुभ
उद्वेग04:23 – 05:32टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3306:48दिन
चंद्र06:4808:02दिन
शनि08:0209:16दिन
गुरु09:1610:30दिन
मंगल10:3011:44दिन
सूर्य11:4412:58दिन
शुक्र12:5814:12दिन
बुध14:1215:26दिन
चंद्र15:2616:40दिन
शनि16:4017:54दिन
गुरु17:5419:08दिन
मंगल19:0820:22दिन
सूर्य20:2221:08रात
शुक्र21:0821:54रात
बुध21:5422:39रात
चंद्र22:3923:25रात
शनि23:2500:11रात
गुरु00:1100:57रात
मंगल00:5701:43रात
सूर्य01:4302:28रात
शुक्र02:2803:14रात
बुध03:1404:00रात
चंद्र04:0004:46रात
शनि04:4605:32रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 मई 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 मई 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 मई 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 मई 2025वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
14 मई 2025वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 मई 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 मई 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 मई 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 मई 2025ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2109° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।