5 दिसंबर 2025 को लंदन का पंचांग

शुक्रवार, 5 दिसंबर 2025, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

शुक्रवार, 5 दिसंबर 2025 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (19:26 तक), नक्षत्र मृगशिरा (03:18, 6 दिस॰ तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 07:49 पर और सूर्यास्त 15:52 पर है। राहुकाल 10:50 से 11:51 तक है।

दिन और रात
दिन 07:49 – 15:52
रात 07:50 तक
तिथि
प्रतिपदा, 19:26 तक
द्वितीया
नक्षत्र
मृगशिरा, 03:18 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 दिसंबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 19:26 तक
कृष्ण द्वितीया 15:56, 6 दिस॰ तक
नक्षत्र
मृगशिरा 03:18, 6 दिस॰ तक
आर्द्रा 00:43, 7 दिस॰ तक
योग
साध्य 22:18 तक
शुभ 18:15, 6 दिस॰ तक
करण
बालव 09:18 तक
कौलव 19:26 तक
तैतिल 05:38, 6 दिस॰ तक
गर 15:56, 6 दिस॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 16:45 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:49
सूर्यास्त
15:52
चंद्रोदय
15:44
चंद्रास्त
09:00
दिनमान
8h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:41 – 06:45
अभिजीत मुहूर्त
11:34 – 12:07

अशुभ समय

राहुकाल
10:50 – 11:51
यमगंड
13:51 – 14:52
गुलिक काल
08:49 – 09:50

5 दिसंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:49 – 08:49सामान्य
लाभ08:49 – 09:50शुभ
अमृत09:50 – 10:50शुभ
काल10:50 – 11:51टालें
शुभ11:51 – 12:51शुभ
रोग12:51 – 13:51टालें
उद्वेग13:51 – 14:52टालें
चर14:52 – 15:52सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग15:52 – 17:52टालें
काल17:52 – 19:52टालें
लाभ19:52 – 21:51शुभ
उद्वेग21:51 – 23:51टालें
शुभ23:51 – 01:51शुभ
अमृत01:51 – 03:51शुभ
चर03:51 – 05:50सामान्य
रोग05:50 – 07:50टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:4908:29दिन
बुध08:2909:09दिन
चंद्र09:0909:50दिन
शनि09:5010:30दिन
गुरु10:3011:10दिन
मंगल11:1011:51दिन
सूर्य11:5112:31दिन
शुक्र12:3113:11दिन
बुध13:1113:51दिन
चंद्र13:5114:32दिन
शनि14:3215:12दिन
गुरु15:1215:52दिन
मंगल15:5217:12रात
सूर्य17:1218:32रात
शुक्र18:3219:52रात
बुध19:5221:12रात
चंद्र21:1222:31रात
शनि22:3123:51रात
गुरु23:5101:11रात
मंगल01:1102:31रात
सूर्य02:3103:51रात
शुक्र03:5105:10रात
बुध05:1006:30रात
चंद्र06:3007:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 दिस॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 दिस॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 दिस॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 दिस॰ 2025धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 दिस॰ 2025पौष अमावस्याअमावस्या
23 दिस॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 जन॰ 2026पौष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2192° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।