14 जून 2026 को लंदन का पंचांग

रविवार, 14 जून 2026, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

रविवार, 14 जून 2026 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (07:50 तक), नक्षत्र रोहिणी (17:44 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 04:42 पर और सूर्यास्त 21:18 पर है। राहुकाल 19:14 से 21:18 तक है।

दिन और रात
दिन 04:42 – 21:18
रात 04:42 तक
तिथि
अमावस्या, 03:54 तक
नक्षत्र
रोहिणी, 17:44 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त
अभिजीत

14 जून 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 07:50 तक
अमावस्या 03:54, 15 जून तक
शुक्ल प्रतिपदा 00:01, 16 जून तक
नक्षत्र
रोहिणी 17:44 तक
मृगशिरा 14:38, 15 जून तक
योग
धृति 08:45 तक
शूलअशुभ 04:25, 15 जून तक
गंडअशुभ 00:09, 16 जून तक
करण
शकुनि 07:50 तक
चतुष्पद 17:52 तक
नाग 03:54, 15 जून तक
किंस्तुघ्न 13:56, 15 जून तक
चंद्र राशि
वृषभ 04:11, 15 जून तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
04:42
सूर्यास्त
21:18
चंद्रोदय
03:19
चंद्रास्त
21:27
दिनमान
16h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
अधिक ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
अधिक ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:43 – 04:13
अभिजीत मुहूर्त
12:27 – 13:34

अशुभ समय

राहुकाल
19:14 – 21:18
यमगंड
13:00 – 15:05
गुलिक काल
17:09 – 19:14

14 जून 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग04:42 – 06:47टालें
चर06:47 – 08:51सामान्य
लाभ08:51 – 10:56शुभ
अमृत10:56 – 13:00शुभ
काल13:00 – 15:05टालें
शुभ15:05 – 17:09शुभ
रोग17:09 – 19:14टालें
उद्वेग19:14 – 21:18टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ21:18 – 22:14शुभ
अमृत22:14 – 23:09शुभ
चर23:09 – 00:05सामान्य
रोग00:05 – 01:00टालें
काल01:00 – 01:56टालें
लाभ01:56 – 02:51शुभ
उद्वेग02:51 – 03:47टालें
शुभ03:47 – 04:42शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य04:4206:05दिन
शुक्र06:0507:28दिन
बुध07:2808:51दिन
चंद्र08:5110:14दिन
शनि10:1411:37दिन
गुरु11:3713:00दिन
मंगल13:0014:23दिन
सूर्य14:2315:46दिन
शुक्र15:4617:09दिन
बुध17:0918:32दिन
चंद्र18:3219:55दिन
शनि19:5521:18दिन
गुरु21:1821:55रात
मंगल21:5522:32रात
सूर्य22:3223:09रात
शुक्र23:0923:46रात
बुध23:4600:23रात
चंद्र00:2301:00रात
शनि01:0001:37रात
गुरु01:3702:14रात
मंगल02:1402:51रात
सूर्य02:5103:28रात
शुक्र03:2804:05रात
बुध04:0504:42रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जून 2026अधिक ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
15 जून 2026मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जून 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 जून 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जून 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जून 2026ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
4 जुल॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 जुल॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 जुल॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2265° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।