23 जुलाई 2026 को लंदन का पंचांग

गुरुवार, 23 जुलाई 2026, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

गुरुवार, 23 जुलाई 2026 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (04:43, 24 जुल॰ तक), नक्षत्र विशाखा (21:12 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 05:11 पर और सूर्यास्त 21:01 पर है। राहुकाल 15:05 से 17:04 तक है।

दिन और रात
दिन 05:11 – 21:01
रात 05:12 तक
तिथि
दशमी, 04:43 तक
नक्षत्र
विशाखा, 21:12 तक
अनुराधा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 जुलाई 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल दशमी 04:43, 24 जुल॰ तक
शुक्ल एकादशी 07:04, 25 जुल॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 21:12 तक
अनुराधा 00:06, 25 जुल॰ तक
योग
शुभ 14:50 तक
शुक्ल 15:41, 24 जुल॰ तक
करण
तैतिल 15:36 तक
गर 04:43, 24 जुल॰ तक
वणिज 17:53, 24 जुल॰ तक
चंद्र राशि
तुला 14:31 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:11
सूर्यास्त
21:01
चंद्रोदय
16:39
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
15h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:06 – 04:38
अभिजीत मुहूर्त
12:34 – 13:38

अशुभ समय

राहुकाल
15:05 – 17:04
यमगंड
05:11 – 07:10
गुलिक काल
09:08 – 11:07

23 जुलाई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:11 – 07:10शुभ
रोग07:10 – 09:08टालें
उद्वेग09:08 – 11:07टालें
चर11:07 – 13:06सामान्य
लाभ13:06 – 15:05शुभ
अमृत15:05 – 17:04शुभ
काल17:04 – 19:03टालें
शुभ19:03 – 21:01शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत21:01 – 22:03शुभ
चर22:03 – 23:04सामान्य
रोग23:04 – 00:05टालें
काल00:05 – 01:07टालें
लाभ01:07 – 02:08शुभ
उद्वेग02:08 – 03:09टालें
शुभ03:09 – 04:11शुभ
अमृत04:11 – 05:12शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:1106:30दिन
मंगल06:3007:49दिन
सूर्य07:4909:08दिन
शुक्र09:0810:28दिन
बुध10:2811:47दिन
चंद्र11:4713:06दिन
शनि13:0614:25दिन
गुरु14:2515:45दिन
मंगल15:4517:04दिन
सूर्य17:0418:23दिन
शुक्र18:2319:42दिन
बुध19:4221:01दिन
चंद्र21:0121:42रात
शनि21:4222:23रात
गुरु22:2323:04रात
मंगल23:0423:45रात
सूर्य23:4500:26रात
शुक्र00:2601:07रात
बुध01:0701:48रात
चंद्र01:4802:29रात
शनि02:2903:09रात
गुरु03:0903:50रात
मंगल03:5004:31रात
सूर्य04:3105:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 जुल॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जुल॰ 2026आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
2 अग॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 अग॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 अग॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 अग॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 अग॰ 2026श्रावण अमावस्याअमावस्या
16 अग॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2026सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2280° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।