22 सितंबर 2027 को लंदन का पंचांग

बुधवार, 22 सितंबर 2027, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

बुधवार, 22 सितंबर 2027 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (00:07, 23 सित॰ तक), नक्षत्र रोहिणी (13:22 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:46 पर और सूर्यास्त 18:59 पर है। राहुकाल 12:52 से 14:24 तक है।

दिन और रात
दिन 06:46 – 18:59
रात 06:47 तक
तिथि
सप्तमी, 00:07 तक
अष्टमी
नक्षत्र
रोहिणी, 13:22 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 सितंबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 00:07, 23 सित॰ तक
कृष्ण अष्टमी 22:27, 23 सित॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 13:22 तक
मृगशिरा 12:37, 23 सित॰ तक
योग
सिद्धि 21:29 तक
व्यतीपातअशुभ 19:05, 23 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 12:48 तक
बव 00:07, 23 सित॰ तक
बालव 11:20, 23 सित॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 01:02, 23 सित॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:46
सूर्यास्त
18:59
चंद्रोदय
21:41
चंद्रास्त
14:41
दिनमान
12h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:12 – 05:59
अभिजीत मुहूर्त
12:28 – 13:17 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:52 – 14:24
यमगंड
08:17 – 09:49
गुलिक काल
11:21 – 12:52

22 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:46 – 08:17शुभ
अमृत08:17 – 09:49शुभ
काल09:49 – 11:21टालें
शुभ11:21 – 12:52शुभ
रोग12:52 – 14:24टालें
उद्वेग14:24 – 15:56टालें
चर15:56 – 17:27सामान्य
लाभ17:27 – 18:59शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:59 – 20:28टालें
शुभ20:28 – 21:56शुभ
अमृत21:56 – 23:25शुभ
चर23:25 – 00:53सामान्य
रोग00:53 – 02:22टालें
काल02:22 – 03:50टालें
लाभ03:50 – 05:19शुभ
उद्वेग05:19 – 06:47टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:4607:47दिन
चंद्र07:4708:48दिन
शनि08:4809:49दिन
गुरु09:4910:50दिन
मंगल10:5011:51दिन
सूर्य11:5112:52दिन
शुक्र12:5213:53दिन
बुध13:5314:55दिन
चंद्र14:5515:56दिन
शनि15:5616:57दिन
गुरु16:5717:58दिन
मंगल17:5818:59दिन
सूर्य18:5919:58रात
शुक्र19:5820:57रात
बुध20:5721:56रात
चंद्र21:5622:55रात
शनि22:5523:54रात
गुरु23:5400:53रात
मंगल00:5301:52रात
सूर्य01:5202:51रात
शुक्र02:5103:50रात
बुध03:5004:49रात
चंद्र04:4905:48रात
शनि05:4806:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 सित॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 सित॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 सित॰ 2027आश्विन अमावस्याअमावस्या
3 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
17 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2443° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।