13 दिसंबर 2027 को लंदन का पंचांग

सोमवार, 13 दिसंबर 2027, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

सोमवार, 13 दिसंबर 2027 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (16:08 तक), नक्षत्र रोहिणी (09:44 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 07:57 पर और सूर्यास्त 15:51 पर है। राहुकाल 08:56 से 09:56 तक है।

दिन और रात
दिन 07:57 – 15:51
रात 07:58 तक
तिथि
पूर्णिमा, 16:08 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
मृगशिरा, 07:55 तक
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 दिसंबर 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
पूर्णिमा 16:08 तक
कृष्ण प्रतिपदा 13:31, 14 दिस॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 09:44 तक
मृगशिरा 07:55, 14 दिस॰ तक
आर्द्रा 05:51, 15 दिस॰ तक
योग
साध्य 14:36 तक
शुभ 11:16, 14 दिस॰ तक
करण
बव 16:08 तक
बालव 02:52, 14 दिस॰ तक
कौलव 13:31, 14 दिस॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 20:52 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:57
सूर्यास्त
15:51
चंद्रोदय
15:16
चंद्रास्त
08:07
दिनमान
7h 54m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:48 – 06:53
अभिजीत मुहूर्त
11:38 – 12:10

अशुभ समय

राहुकाल
08:56 – 09:56
यमगंड
10:55 – 11:54
गुलिक काल
12:53 – 13:52

13 दिसंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:57 – 08:56शुभ
काल08:56 – 09:56टालें
शुभ09:56 – 10:55शुभ
रोग10:55 – 11:54टालें
उद्वेग11:54 – 12:53टालें
चर12:53 – 13:52सामान्य
लाभ13:52 – 14:52शुभ
अमृत14:52 – 15:51शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर15:51 – 17:52सामान्य
रोग17:52 – 19:53टालें
काल19:53 – 21:54टालें
लाभ21:54 – 23:54शुभ
उद्वेग23:54 – 01:55टालें
शुभ01:55 – 03:56शुभ
अमृत03:56 – 05:57शुभ
चर05:57 – 07:58सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:5708:37दिन
शनि08:3709:16दिन
गुरु09:1609:56दिन
मंगल09:5610:35दिन
सूर्य10:3511:15दिन
शुक्र11:1511:54दिन
बुध11:5412:33दिन
चंद्र12:3313:13दिन
शनि13:1313:52दिन
गुरु13:5214:32दिन
मंगल14:3215:11दिन
सूर्य15:1115:51दिन
शुक्र15:5117:11रात
बुध17:1118:32रात
चंद्र18:3219:53रात
शनि19:5321:13रात
गुरु21:1322:34रात
मंगल22:3423:54रात
सूर्य23:5401:15रात
शुक्र01:1502:36रात
बुध02:3603:56रात
चंद्र03:5605:17रात
शनि05:1706:37रात
गुरु06:3707:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 दिस॰ 2027मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
16 दिस॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 दिस॰ 2027धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
20 दिस॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 दिस॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 दिस॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
31 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 जन॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 जन॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 जन॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2475° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।