4 फ़रवरी 2029 को लंदन का पंचांग

रविवार, 4 फ़रवरी 2029, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

रविवार, 4 फ़रवरी 2029 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (12:53 तक), नक्षत्र चित्रा (17:49 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 07:33 पर और सूर्यास्त 16:55 पर है। राहुकाल 15:45 से 16:55 तक है।

दिन और रात
दिन 07:33 – 16:55
रात 07:31 तक
तिथि
षष्ठी, 12:53 तक
सप्तमी
नक्षत्र
चित्रा, 17:49 तक
स्वाति
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 फ़रवरी 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 12:53 तक
कृष्ण सप्तमी 10:45, 5 फ़र॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 17:49 तक
स्वाति 16:30, 5 फ़र॰ तक
योग
शूलअशुभ 20:01 तक
गंडअशुभ 17:12, 5 फ़र॰ तक
करण
वणिज 12:53 तक
विष्टि (भद्रा) 23:46 तक
बव 10:45, 5 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:33
सूर्यास्त
16:55
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
09:11
दिनमान
9h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:36 – 06:34
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:33

अशुभ समय

राहुकाल
15:45 – 16:55
यमगंड
12:14 – 13:25
गुलिक काल
14:35 – 15:45

4 फ़रवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:33 – 08:43टालें
चर08:43 – 09:54सामान्य
लाभ09:54 – 11:04शुभ
अमृत11:04 – 12:14शुभ
काल12:14 – 13:25टालें
शुभ13:25 – 14:35शुभ
रोग14:35 – 15:45टालें
उद्वेग15:45 – 16:55टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ16:55 – 18:45शुभ
अमृत18:45 – 20:34शुभ
चर20:34 – 22:24सामान्य
रोग22:24 – 00:13टालें
काल00:13 – 02:03टालें
लाभ02:03 – 03:52शुभ
उद्वेग03:52 – 05:42टालें
शुभ05:42 – 07:31शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:3308:20दिन
शुक्र08:2009:07दिन
बुध09:0709:54दिन
चंद्र09:5410:41दिन
शनि10:4111:27दिन
गुरु11:2712:14दिन
मंगल12:1413:01दिन
सूर्य13:0113:48दिन
शुक्र13:4814:35दिन
बुध14:3515:22दिन
चंद्र15:2216:09दिन
शनि16:0916:55दिन
गुरु16:5518:08रात
मंगल18:0819:21रात
सूर्य19:2120:34रात
शुक्र20:3421:47रात
बुध21:4723:00रात
चंद्र23:0000:13रात
शनि00:1301:26रात
गुरु01:2602:39रात
मंगल02:3903:52रात
सूर्य03:5205:05रात
शुक्र05:0506:18रात
बुध06:1807:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 फ़र॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
8 फ़र॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
13 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
24 फ़र॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2029फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
3 मार्च 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2635° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।