10 अगस्त 2029 को लंदन का पंचांग

शुक्रवार, 10 अगस्त 2029, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

शुक्रवार, 10 अगस्त 2029 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (00:42, 11 अग॰ तक), नक्षत्र आश्लेषा (14:01 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:38 पर और सूर्यास्त 20:32 पर है। राहुकाल 11:13 से 13:05 तक है।

दिन और रात
दिन 05:38 – 20:32
रात 05:40 तक
तिथि
प्रतिपदा, 00:42 तक
द्वितीया
नक्षत्र
आश्लेषा, 14:01 तक
मघा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 अगस्त 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 00:42, 11 अग॰ तक
शुक्ल द्वितीया 22:09, 11 अग॰ तक
नक्षत्र
मघा 12:24, 11 अग॰ तक
योग
वरीयान 23:38 तक
परिघअशुभ 20:29, 11 अग॰ तक
करण
किंस्तुघ्न 13:52 तक
बव 00:42, 11 अग॰ तक
बालव 11:27, 11 अग॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 14:01 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:38
सूर्यास्त
20:32
चंद्रोदय
06:10
चंद्रास्त
20:18
दिनमान
14h 54m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 – 05:02
अभिजीत मुहूर्त
12:35 – 13:35

अशुभ समय

राहुकाल
11:13 – 13:05
यमगंड
16:48 – 18:40
गुलिक काल
07:30 – 09:21

10 अगस्त 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:38 – 07:30सामान्य
लाभ07:30 – 09:21शुभ
अमृत09:21 – 11:13शुभ
काल11:13 – 13:05टालें
शुभ13:05 – 14:57शुभ
रोग14:57 – 16:48टालें
उद्वेग16:48 – 18:40टालें
चर18:40 – 20:32सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग20:32 – 21:40टालें
काल21:40 – 22:49टालें
लाभ22:49 – 23:57शुभ
उद्वेग23:57 – 01:06टालें
शुभ01:06 – 02:14शुभ
अमृत02:14 – 03:23शुभ
चर03:23 – 04:31सामान्य
रोग04:31 – 05:40टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:3806:52दिन
बुध06:5208:07दिन
चंद्र08:0709:21दिन
शनि09:2110:36दिन
गुरु10:3611:50दिन
मंगल11:5013:05दिन
सूर्य13:0514:19दिन
शुक्र14:1915:34दिन
बुध15:3416:48दिन
चंद्र16:4818:03दिन
शनि18:0319:17दिन
गुरु19:1720:32दिन
मंगल20:3221:17रात
सूर्य21:1722:03रात
शुक्र22:0322:49रात
बुध22:4923:34रात
चंद्र23:3400:20रात
शनि00:2001:06रात
गुरु01:0601:51रात
मंगल01:5102:37रात
सूर्य02:3703:23रात
शुक्र03:2304:08रात
बुध04:0804:54रात
चंद्र04:5405:40रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 अग॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 अग॰ 2029सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
21 अग॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 अग॰ 2029श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
28 अग॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 सित॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 सित॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 सित॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 सित॰ 2029भाद्रपद अमावस्याअमावस्या

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2706° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।