17 दिसंबर 2027 को लखनऊ का पंचांग

शुक्रवार, 17 दिसंबर 2027, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 17 दिसंबर 2027 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (10:34 तक), नक्षत्र पुष्य (07:07 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:48 पर और सूर्यास्त 17:15 पर है। राहुकाल 10:43 से 12:02 तक है।

दिन और रात
दिन 06:48 – 17:15
रात 06:48 तक
तिथि
चतुर्थी, 10:34 तक
पंचमी
नक्षत्र
आश्लेषा, 05:11 तक
मघा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 दिसंबर 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 10:34 तक
कृष्ण पंचमी 07:58, 18 दिस॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 07:07 तक
आश्लेषा 05:11, 18 दिस॰ तक
मघा 03:30, 19 दिस॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 02:47, 18 दिस॰ तक
विष्कंभअशुभ 23:35, 18 दिस॰ तक
करण
बालव 10:34 तक
कौलव 21:14 तक
तैतिल 07:58, 18 दिस॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 05:11, 18 दिस॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:48
सूर्यास्त
17:15
चंद्रोदय
21:20
चंद्रास्त
09:56
दिनमान
10h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:59 – 05:54
अभिजीत मुहूर्त
11:41 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
10:43 – 12:02
यमगंड
14:38 – 15:57
गुलिक काल
08:06 – 09:25

17 दिसंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:48 – 08:06सामान्य
लाभ08:06 – 09:25शुभ
अमृत09:25 – 10:43शुभ
काल10:43 – 12:02टालें
शुभ12:02 – 13:20शुभ
रोग13:20 – 14:38टालें
उद्वेग14:38 – 15:57टालें
चर15:57 – 17:15सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:15 – 18:57टालें
काल18:57 – 20:39टालें
लाभ20:39 – 22:20शुभ
उद्वेग22:20 – 00:02टालें
शुभ00:02 – 01:43शुभ
अमृत01:43 – 03:25शुभ
चर03:25 – 05:07सामान्य
रोग05:07 – 06:48टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:4807:40दिन
बुध07:4008:32दिन
चंद्र08:3209:25दिन
शनि09:2510:17दिन
गुरु10:1711:09दिन
मंगल11:0912:02दिन
सूर्य12:0212:54दिन
शुक्र12:5413:46दिन
बुध13:4614:38दिन
चंद्र14:3815:31दिन
शनि15:3116:23दिन
गुरु16:2317:15दिन
मंगल17:1518:23रात
सूर्य18:2319:31रात
शुक्र19:3120:39रात
बुध20:3921:46रात
चंद्र21:4622:54रात
शनि22:5400:02रात
गुरु00:0201:10रात
मंगल01:1002:17रात
सूर्य02:1703:25रात
शुक्र03:2504:33रात
बुध04:3305:41रात
चंद्र05:4106:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 दिस॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 दिस॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 दिस॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 दिस॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
1 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 जन॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 जन॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 जन॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
15 जन॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जन॰ 2028मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2476° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।