25 जून 2028 को लखनऊ का पंचांग

रविवार, 25 जून 2028, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 25 जून 2028 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (16:55 तक), नक्षत्र पुष्य (17:45 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:14 पर और सूर्यास्त 19:03 पर है। राहुकाल 17:19 से 19:03 तक है।

दिन और रात
दिन 05:14 – 19:03
रात 05:14 तक
तिथि
तृतीया, 16:55 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
पुष्य, 17:45 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 जून 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 16:55 तक
शुक्ल चतुर्थी 14:17, 26 जून तक
नक्षत्र
पुष्य 17:45 तक
आश्लेषा 15:55, 26 जून तक
योग
व्याघातअशुभ 12:13 तक
हर्षण 09:01, 26 जून तक
करण
तैतिल 06:13 तक
गर 16:55 तक
वणिज 03:36, 26 जून तक
विष्टि (भद्रा) 14:17, 26 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:14
सूर्यास्त
19:03
चंद्रोदय
07:41
चंद्रास्त
21:19
दिनमान
13h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:52 – 04:33
अभिजीत मुहूर्त
11:41 – 12:36

अशुभ समय

राहुकाल
17:19 – 19:03
यमगंड
12:08 – 13:52
गुलिक काल
15:36 – 17:19

25 जून 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:14 – 06:57टालें
चर06:57 – 08:41सामान्य
लाभ08:41 – 10:25शुभ
अमृत10:25 – 12:08शुभ
काल12:08 – 13:52टालें
शुभ13:52 – 15:36शुभ
रोग15:36 – 17:19टालें
उद्वेग17:19 – 19:03टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:03 – 20:20शुभ
अमृत20:20 – 21:36शुभ
चर21:36 – 22:52सामान्य
रोग22:52 – 00:09टालें
काल00:09 – 01:25टालें
लाभ01:25 – 02:41शुभ
उद्वेग02:41 – 03:58टालें
शुभ03:58 – 05:14शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:1406:23दिन
शुक्र06:2307:32दिन
बुध07:3208:41दिन
चंद्र08:4109:50दिन
शनि09:5010:59दिन
गुरु10:5912:08दिन
मंगल12:0813:18दिन
सूर्य13:1814:27दिन
शुक्र14:2715:36दिन
बुध15:3616:45दिन
चंद्र16:4517:54दिन
शनि17:5419:03दिन
गुरु19:0319:54रात
मंगल19:5420:45रात
सूर्य20:4521:36रात
शुक्र21:3622:27रात
बुध22:2723:18रात
चंद्र23:1800:09रात
शनि00:0900:59रात
गुरु00:5901:50रात
मंगल01:5002:41रात
सूर्य02:4103:32रात
शुक्र03:3204:23रात
बुध04:2305:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 जून 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 जुल॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 जुल॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 जुल॰ 2028आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
10 जुल॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जुल॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 जुल॰ 2028कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 जुल॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 जुल॰ 2028श्रावण अमावस्याअमावस्या

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2549° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।