26 जून 2028 को लखनऊ का पंचांग

सोमवार, 26 जून 2028, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 26 जून 2028 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (14:17 तक), नक्षत्र आश्लेषा (15:55 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:14 पर और सूर्यास्त 19:03 पर है। राहुकाल 06:58 से 08:41 तक है।

दिन और रात
दिन 05:14 – 19:03
रात 05:14 तक
तिथि
चतुर्थी, 14:17 तक
पंचमी
नक्षत्र
आश्लेषा, 15:55 तक
मघा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 जून 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 14:17 तक
शुक्ल पंचमी 11:39, 27 जून तक
नक्षत्र
मघा 14:06, 27 जून तक
योग
हर्षण 09:01 तक
वज्रअशुभ 05:49, 27 जून तक
करण
विष्टि (भद्रा) 14:17 तक
बव 00:58, 27 जून तक
बालव 11:39, 27 जून तक
चंद्र राशि
कर्क 15:55 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:14
सूर्यास्त
19:03
चंद्रोदय
08:48
चंद्रास्त
21:59
दिनमान
13h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:53 – 04:33
अभिजीत मुहूर्त
11:41 – 12:36

अशुभ समय

राहुकाल
06:58 – 08:41
यमगंड
10:25 – 12:09
गुलिक काल
13:52 – 15:36

26 जून 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:14 – 06:58शुभ
काल06:58 – 08:41टालें
शुभ08:41 – 10:25शुभ
रोग10:25 – 12:09टालें
उद्वेग12:09 – 13:52टालें
चर13:52 – 15:36सामान्य
लाभ15:36 – 17:20शुभ
अमृत17:20 – 19:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:03 – 20:20सामान्य
रोग20:20 – 21:36टालें
काल21:36 – 22:52टालें
लाभ22:52 – 00:09शुभ
उद्वेग00:09 – 01:25टालें
शुभ01:25 – 02:42शुभ
अमृत02:42 – 03:58शुभ
चर03:58 – 05:14सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:1406:23दिन
शनि06:2307:32दिन
गुरु07:3208:41दिन
मंगल08:4109:50दिन
सूर्य09:5011:00दिन
शुक्र11:0012:09दिन
बुध12:0913:18दिन
चंद्र13:1814:27दिन
शनि14:2715:36दिन
गुरु15:3616:45दिन
मंगल16:4517:54दिन
सूर्य17:5419:03दिन
शुक्र19:0319:54रात
बुध19:5420:45रात
चंद्र20:4521:36रात
शनि21:3622:27रात
गुरु22:2723:18रात
मंगल23:1800:09रात
सूर्य00:0901:00रात
शुक्र01:0001:51रात
बुध01:5102:42रात
चंद्र02:4203:32रात
शनि03:3204:23रात
गुरु04:2305:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 जून 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 जुल॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 जुल॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 जुल॰ 2028आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
10 जुल॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जुल॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 जुल॰ 2028कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 जुल॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 जुल॰ 2028श्रावण अमावस्याअमावस्या
25 जुल॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2550° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।