17 अगस्त 2029 को लखनऊ का पंचांग

शुक्रवार, 17 अगस्त 2029, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 17 अगस्त 2029 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (11:27 तक), नक्षत्र विशाखा (06:16 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:38 पर और सूर्यास्त 18:41 पर है। राहुकाल 10:32 से 12:10 तक है।

दिन और रात
दिन 05:38 – 18:41
रात 05:39 तक
तिथि
अष्टमी, 11:27 तक
नवमी
नक्षत्र
अनुराधा, 05:17 तक
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 अगस्त 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 11:27 तक
शुक्ल नवमी 09:47, 18 अग॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 06:16 तक
अनुराधा 05:17, 18 अग॰ तक
ज्येष्ठा 04:38, 19 अग॰ तक
योग
ब्रह्म 06:02 तक
इंद्र 03:32, 18 अग॰ तक
वैधृतिअशुभ 01:20, 19 अग॰ तक
करण
बव 11:27 तक
बालव 22:34 तक
कौलव 09:47, 18 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:38
सूर्यास्त
18:41
चंद्रोदय
13:08
चंद्रास्त
23:50
दिनमान
13h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:11 – 04:55
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:36

अशुभ समय

राहुकाल
10:32 – 12:10
यमगंड
15:25 – 17:03
गुलिक काल
07:16 – 08:54

17 अगस्त 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:38 – 07:16सामान्य
लाभ07:16 – 08:54शुभ
अमृत08:54 – 10:32शुभ
काल10:32 – 12:10टालें
शुभ12:10 – 13:47शुभ
रोग13:47 – 15:25टालें
उद्वेग15:25 – 17:03टालें
चर17:03 – 18:41सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:41 – 20:03टालें
काल20:03 – 21:25टालें
लाभ21:25 – 22:48शुभ
उद्वेग22:48 – 00:10टालें
शुभ00:10 – 01:32शुभ
अमृत01:32 – 02:54शुभ
चर02:54 – 04:17सामान्य
रोग04:17 – 05:39टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:3806:44दिन
बुध06:4407:49दिन
चंद्र07:4908:54दिन
शनि08:5409:59दिन
गुरु09:5911:04दिन
मंगल11:0412:10दिन
सूर्य12:1013:15दिन
शुक्र13:1514:20दिन
बुध14:2015:25दिन
चंद्र15:2516:30दिन
शनि16:3017:36दिन
गुरु17:3618:41दिन
मंगल18:4119:36रात
सूर्य19:3620:31रात
शुक्र20:3121:25रात
बुध21:2522:20रात
चंद्र22:2023:15रात
शनि23:1500:10रात
गुरु00:1001:05रात
मंगल01:0501:59रात
सूर्य01:5902:54रात
शुक्र02:5403:49रात
बुध03:4904:44रात
चंद्र04:4405:39रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अग॰ 2029सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अग॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 अग॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 अग॰ 2029श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
28 अग॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 सित॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 सित॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 सित॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 सित॰ 2029भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
11 सित॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2709° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।