27 मार्च 2025 को मेलबर्न का पंचांग

गुरुवार, 27 मार्च 2025, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

गुरुवार, 27 मार्च 2025 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (04:33, 28 मार्च तक), नक्षत्र धनिष्ठा (07:59 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 07:29 पर और सूर्यास्त 19:21 पर है। राहुकाल 14:54 से 16:23 तक है।

दिन और रात
दिन 07:29 – 19:21
रात 07:30 तक
तिथि
त्रयोदशी, 04:33 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
शतभिषा, 06:03 तक
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 मार्च 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 04:33, 28 मार्च तक
कृष्ण चतुर्दशी 01:25, 29 मार्च तक
नक्षत्र
शतभिषा 06:03, 28 मार्च तक
पूर्वा भाद्रपद 03:39, 29 मार्च तक
योग
साध्य 14:54 तक
शुभ 11:26, 28 मार्च तक
करण
गर 17:57 तक
वणिज 04:33, 28 मार्च तक
विष्टि (भद्रा) 15:02, 28 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:29
सूर्यास्त
19:21
चंद्रोदय
04:24
चंद्रास्त
18:10
दिनमान
11h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:52 – 06:40
अभिजीत मुहूर्त
13:01 – 13:48

अशुभ समय

राहुकाल
14:54 – 16:23
यमगंड
07:29 – 08:58
गुलिक काल
10:27 – 11:56

27 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:29 – 08:58शुभ
रोग08:58 – 10:27टालें
उद्वेग10:27 – 11:56टालें
चर11:56 – 13:25सामान्य
लाभ13:25 – 14:54शुभ
अमृत14:54 – 16:23शुभ
काल16:23 – 17:52टालें
शुभ17:52 – 19:21शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:21 – 20:52शुभ
चर20:52 – 22:23सामान्य
रोग22:23 – 23:54टालें
काल23:54 – 01:25टालें
लाभ01:25 – 02:56शुभ
उद्वेग02:56 – 04:27टालें
शुभ04:27 – 05:59शुभ
अमृत05:59 – 07:30शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:2908:28दिन
मंगल08:2809:27दिन
सूर्य09:2710:27दिन
शुक्र10:2711:26दिन
बुध11:2612:25दिन
चंद्र12:2513:25दिन
शनि13:2514:24दिन
गुरु14:2415:23दिन
मंगल15:2316:23दिन
सूर्य16:2317:22दिन
शुक्र17:2218:21दिन
बुध18:2119:21दिन
चंद्र19:2120:21रात
शनि20:2121:22रात
गुरु21:2222:23रात
मंगल22:2323:24रात
सूर्य23:2400:24रात
शुक्र00:2401:25रात
बुध01:2502:26रात
चंद्र02:2603:27रात
शनि03:2704:27रात
गुरु04:2705:28रात
मंगल05:2806:29रात
सूर्य06:2907:30रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 मार्च 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 मार्च 2025चैत्र अमावस्याअमावस्या
2 अप्रैल 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 अप्रैल 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 अप्रैल 2025चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
14 अप्रैल 2025मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 अप्रैल 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 अप्रैल 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2095° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।