5 अक्टूबर 2025 को मेलबर्न का पंचांग

रविवार, 5 अक्टूबर 2025, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

रविवार, 5 अक्टूबर 2025 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (20:34 तक), नक्षत्र शतभिषा (13:31 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:49 पर और सूर्यास्त 19:27 पर है। राहुकाल 17:53 से 19:27 तक है।

दिन और रात
दिन 06:49 – 19:27
रात 06:48 तक
तिथि
त्रयोदशी, 20:34 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
शतभिषा, 13:31 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 20:34 तक
शुक्ल चतुर्दशी 17:54, 6 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 13:31 तक
पूर्वा भाद्रपद 11:46, 6 अक्टू॰ तक
योग
गंडअशुभ 22:04 तक
वृद्धि 18:43, 6 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 09:42 तक
तैतिल 20:34 तक
गर 07:18, 6 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 06:15, 6 अक्टू॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:49
सूर्यास्त
19:27
चंद्रोदय
17:17
चंद्रास्त
05:37
दिनमान
12h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:18 – 06:04
अभिजीत मुहूर्त
12:43 – 13:34

अशुभ समय

राहुकाल
17:53 – 19:27
यमगंड
13:08 – 14:43
गुलिक काल
16:18 – 17:53

5 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:49 – 08:24टालें
चर08:24 – 09:59सामान्य
लाभ09:59 – 11:34शुभ
अमृत11:34 – 13:08शुभ
काल13:08 – 14:43टालें
शुभ14:43 – 16:18शुभ
रोग16:18 – 17:53टालें
उद्वेग17:53 – 19:27टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:27 – 20:53शुभ
अमृत20:53 – 22:18शुभ
चर22:18 – 23:43सामान्य
रोग23:43 – 01:08टालें
काल01:08 – 02:33टालें
लाभ02:33 – 03:58शुभ
उद्वेग03:58 – 05:23टालें
शुभ05:23 – 06:48शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:4907:53दिन
शुक्र07:5308:56दिन
बुध08:5609:59दिन
चंद्र09:5911:02दिन
शनि11:0212:05दिन
गुरु12:0513:08दिन
मंगल13:0814:12दिन
सूर्य14:1215:15दिन
शुक्र15:1516:18दिन
बुध16:1817:21दिन
चंद्र17:2118:24दिन
शनि18:2419:27दिन
गुरु19:2720:24रात
मंगल20:2421:21रात
सूर्य21:2122:18रात
शुक्र22:1823:14रात
बुध23:1400:11रात
चंद्र00:1101:08रात
शनि01:0802:04रात
गुरु02:0403:01रात
मंगल03:0103:58रात
सूर्य03:5804:54रात
शुक्र04:5405:51रात
बुध05:5106:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
26 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2169° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।