6 अक्टूबर 2025 को मेलबर्न का पंचांग

सोमवार, 6 अक्टूबर 2025, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

सोमवार, 6 अक्टूबर 2025 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (17:54 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (11:46 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 06:48 पर और सूर्यास्त 19:28 पर है। राहुकाल 08:23 से 09:58 तक है।

दिन और रात
दिन 06:48 – 19:28
रात 06:46 तक
तिथि
चतुर्दशी, 17:54 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 11:46 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 17:54 तक
पूर्णिमा 14:47, 7 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 09:31, 7 अक्टू॰ तक
योग
वृद्धि 18:43 तक
ध्रुव 15:01, 7 अक्टू॰ तक
करण
गर 07:18 तक
वणिज 17:54 तक
विष्टि (भद्रा) 04:23, 7 अक्टू॰ तक
बव 14:47, 7 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:48
सूर्यास्त
19:28
चंद्रोदय
18:29
चंद्रास्त
06:03
दिनमान
12h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:17 – 06:03
अभिजीत मुहूर्त
12:43 – 13:33

अशुभ समय

राहुकाल
08:23 – 09:58
यमगंड
11:33 – 13:08
गुलिक काल
14:43 – 16:18

6 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:48 – 08:23शुभ
काल08:23 – 09:58टालें
शुभ09:58 – 11:33शुभ
रोग11:33 – 13:08टालें
उद्वेग13:08 – 14:43टालें
चर14:43 – 16:18सामान्य
लाभ16:18 – 17:53शुभ
अमृत17:53 – 19:28शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:28 – 20:53सामान्य
रोग20:53 – 22:18टालें
काल22:18 – 23:43टालें
लाभ23:43 – 01:07शुभ
उद्वेग01:07 – 02:32टालें
शुभ02:32 – 03:57शुभ
अमृत03:57 – 05:22शुभ
चर05:22 – 06:46सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:4807:51दिन
शनि07:5108:55दिन
गुरु08:5509:58दिन
मंगल09:5811:01दिन
सूर्य11:0112:05दिन
शुक्र12:0513:08दिन
बुध13:0814:12दिन
चंद्र14:1215:15दिन
शनि15:1516:18दिन
गुरु16:1817:22दिन
मंगल17:2218:25दिन
सूर्य18:2519:28दिन
शुक्र19:2820:25रात
बुध20:2521:21रात
चंद्र21:2122:18रात
शनि22:1823:14रात
गुरु23:1400:11रात
मंगल00:1101:07रात
सूर्य01:0702:04रात
शुक्र02:0403:00रात
बुध03:0003:57रात
चंद्र03:5704:53रात
शनि04:5305:50रात
गुरु05:5006:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
26 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2169° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।